July 05, 2026


भारत में लॉन्च हुआ मल्टी-कैंसर डिटेक्शन टेस्ट, एक ब्लड टेस्ट से 10 प्रकार के कैंसर की शुरुआती स्क्रीनिंग

भारत में कैंसर के मामलों को शुरुआती दौर में पकड़ने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी मिली है. अहमदाबाद स्थित प्रमुख फार्मा कंपनी जायडस लाइफसाइंसेज (Zydus Lifesciences) ने अपोलो हॉस्पिटल्स के साथ मिलकर देश में 'शील्ड मल्टी-कैंसर डिटेक्शन' (Shield MCD) टेस्ट लॉन्च किया है.

यह एक ऐसा अत्याधुनिक ब्लड टेस्ट है जो केवल एक बार खून का सैंपल लेकर शरीर में पल रहे 10 आम प्रकार के कैंसर के शुरुआती संकेतों को पहचान सकता है. अमेरिकी कंपनी 'गार्डेंट हेल्थ' द्वारा विकसित इस तकनीक को भारत में पहली बार लाया गया है.

कैसे काम करता है यह अनूठा ब्लड टेस्ट?

यह टेस्ट मुख्य रूप से 45 वर्ष या उससे अधिक उम्र के उन वयस्कों के लिए डिज़ाइन किया गया है जिन्हें कैंसर होने का सामान्य जोखिम है. जब कैंसर कोशिकाएं शरीर में पनपती हैं, तो वे रक्तप्रवाह में डीएनए (DNA) के छोटे-छोटे टुकड़े छोड़ती हैं. शील्ड एमसीडी टेस्ट इसी डीएनए में होने वाले रासायनिक बदलावों (मिथाइलेशन पैटर्न) का विश्लेषण करता है. उन्नत जीनोमिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से यह टेस्ट न केवल कैंसर के असामान्य संकेतों को पकड़ता है, बल्कि यह भी संकेत दे सकता है कि कैंसर किस अंग से शुरू हुआ है. 

इन 10 गंभीर कैंसर की हो सकेगी स्क्रीनिंग

इस सिंगल ब्लड टेस्ट के जरिए देश में सबसे ज्यादा पाए जाने वाले और जानलेवा साबित होने वाले 10 कैंसर की स्क्रीनिंग की जा सकती है. इनमें शामिल हैं:

स्तन (Breast) और फेफड़ों (Lung) का कैंसर.

कोलोरेक्टल (आंत), लिवर और पेट (Stomach) का कैंसर.

अग्न्याशय (Pancreatic) और ऑसोफेगल (भोजन नली) का कैंसर.

प्रोस्टेट, ब्लैडर (मूत्रशय) और ओवेरियन (अंडाशय) का कैंसर.

पारंपरिक जांच से कितना अलग है यह टेस्ट?

पारंपरिक कैंसर स्क्रीनिंग में अलग-अलग अंगों के लिए अलग-अलग टेस्ट करने पड़ते हैं. जैसे स्तन कैंसर के लिए मैमोग्राफी, आंत के लिए कोलोनोस्कोपी और गर्भाशय ग्रीवा के लिए पैप स्मीयर. यह नया टेस्ट एक ही बार में कई कैंसर के संकेतों की पहचान करने की कोशिश करता है, जिससे प्रक्रिया बेहद आसान और कम दर्दनाक हो जाती है. हालांकि, डॉक्टरों ने साफ किया है कि यह टेस्ट पारंपरिक स्क्रीनिंग का विकल्प नहीं है और न ही यह अंतिम डायग्नोसिस (निदान) है.

भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए क्यों अहम है यह तकनीक?

भारत में साल 2022 के आंकड़ों के अनुसार 14.1 लाख से अधिक नए कैंसर मामले सामने आए थे और लगभग 9 लाख लोगों की मौत हुई थी. देश में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण यह है कि मरीजों को बीमारी का पता तब चलता है जब वह आखिरी स्टेज पर पहुंच जाती है. विशेष रूप से अग्न्याशय, लिवर और ओवरी के कैंसर के लिए कोई सामान्य स्क्रीनिंग प्रोग्राम नहीं है. ऐसे में एशिया के 6 देशों में 84,000 से अधिक लोगों पर हुए एक अध्ययन में इस टेस्ट ने 79 प्रतिशत सटीक परिणाम दिखाए हैं, जो काफी उत्साहजनक हैं.

विशेषज्ञों की सलाह और उपलब्धता

कैंसर विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने इस तकनीक का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही सतर्क रहने की सलाह भी दी है. डॉक्टरों के मुताबिक, यदि इस टेस्ट का परिणाम पॉजिटिव आता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि मरीज को कैंसर है ही. इसके लिए बायोप्सी, एंडोस्कोपी या पेट स्कैन जैसे पारंपरिक टेस्ट कराने होंगे. इसी तरह, नेगेटिव रिपोर्ट आने पर भी रूटीन चेकअप बंद नहीं करने चाहिए.

भारत में इस टेस्ट की कीमत का आधिकारिक एलान अभी नहीं किया गया है. शुरुआत में यह टेस्ट अपोलो हॉस्पिटल्स के माध्यम से उपलब्ध होगा और रिपोर्ट्स के अनुसार डॉ. डैंग्स लैब भी इसे देशव्यापी स्तर पर उपलब्ध करा सकती है.


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