खरसिया रिपोर्टर राकेश अग्रवाल गायत्री की रिपोर्ट : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की खरसिया तहसील अंतर्गत ग्राम बानीपाथर स्थित धान खरीदी केंद्र में किसानों के साथ खुली लूट का मामला सामने आया है। यहां धान खरीदी के नाम पर सरकारी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आरोप है कि केंद्र प्रबंधक, नोडल अधिकारी एवं राजस्व अमले की मिलीभगत से किसानों की धान की तौल में भारी हेराफेरी की जा रही है, जिससे गरीब अन्नदाताओं को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों ने बताया कि शासन के स्पष्ट निर्देशानुसार प्रति बोरी धान का मानक वजन 40 किलो 600 ग्राम निर्धारित है, लेकिन बानीपाथर खरीदी केंद्र में जबरन 42 से 43 किलो तक धान तौला जा रहा है। जब किसान इसका विरोध करते हैं तो उन्हें धमकाया जाता है—“धान बेचनी है तो यही तौल मानो, वरना बोरी उठाकर घर जाओ।” मजबूर किसान, दूर-दराज से आए होने के कारण, अपनी मेहनत की फसल इसी अन्यायपूर्ण तौल पर बेचने को विवश हो रहे हैं।
मीडिया के समक्ष जब किसानों की शिकायत पर केंद्र के कांटे की जांच की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। प्रति बोरी 2 से 3 किलो तक अतिरिक्त तौल की पुष्टि हुई। इसका सीधा मतलब है कि प्रति क्विंटल किसानों को सैकड़ों रुपये का नुकसान, जबकि खरीदी केंद्र से जुड़े जिम्मेदारों की जेबें भर रही हैं।
एक किसान ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि सरकार पारदर्शिता और सीसीटीवी की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। यहां न तो सीसीटीवी का डर है और न ही कार्रवाई का।
गौरतलब है कि धान खरीदी सीजन 2025-26 में प्रदेशभर से लगातार घोटालों की खबरें सामने आ रही हैं। हाल ही में राज्य सरकार ने 12 जिलों में 38 कर्मचारियों पर कार्रवाई की है, जिसमें रायगढ़ जिला भी शामिल है। इसके बावजूद बानीपाथर जैसे केंद्रों पर खुलेआम अनियमितताएं जारी हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्थानीय प्रशासन और खाद्य विभाग कब जागेगा? क्या बानीपाथर धान खरीदी केंद्र में तत्काल जांच, कांटा परीक्षण, सीसीटीवी फुटेज की जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी? यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो किसानों का सरकार से भरोसा पूरी तरह टूटना तय l