डोंगरगढ़ :- डोंगरगढ़ विधानसभा के ग्राम पंचायत बसूला में मिनीमाता भवन को लेकर आई ‘सौगात’ अब ग्रामीणों के लिए मजाक बनकर रह गई है। 23 जनवरी को ₹3 लाख की स्वीकृति की खबर से जहां गांव में जश्न का माहौल था, वहीं महज छह दिनों के भीतर वही राशि “रास्ता बदलकर” दूसरे गांव पहुंच गई। अब बसूला में खुशी नहीं, सवाल और व्यंग्य गूंज रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि मिनीमाता भवन निर्माण के नाम पर मिली स्वीकृति को संशोधित कर जुरला खुर्द पंचायत के खपरी चमार गांव में संत बालक दास जी की मूर्ति स्थापना के लिए ट्रांसफर कर दिया गया। बसूला के लोग इसे “घोषणा एक्सप्रेस” बता रहे हैं—जो यहां से चलती है और बिना रुके कहीं और पहुंच जाती है।
सरपंच मालिखम कोसरे ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह सीधा-सीधा गांव की आस्था के साथ खेल है। “सालों से मांग कर रहे थे, जब मंजूरी मिली तो लगा सपना पूरा होगा… लेकिन यहां तो मंजूरी भी टिक नहीं पाई,” उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा। आज भी गांव में लोग खुले आसमान के नीचे पूजा-अर्चना करने को मजबूर हैं।
गांव में व्यंग्य अपने चरम पर है—
“बसूला को भवन नहीं, ‘ट्रायल वर्जन’ मिला था… जो 6 दिन में एक्सपायर हो गया।”
“यहां विकास नहीं, फाइलें घूमती हैं… और फैसले ट्रांसफर होते हैं।”
पूरा मामला अब विधायक हर्षिता बघेल के फैसले पर सीधे सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि विधायक का कहना है कि बसूला में पहले से निर्माण होने की जानकारी मिलने पर राशि को संशोधित किया गया है और ग्रामीणों की आस्था का सम्मान किया जाएगा।
लेकिन बसूला के लोग अब साफ शब्दों में कह रहे हैं—
“हमें घोषणा नहीं, जमीन पर काम चाहिए… क्योंकि कागजों के भवन में न छांव मिलती है, न विश्वास।”
अब देखना यह है कि बसूला को सच में कोई नई सौगात मिलती है या फिर यह गांव भी ‘स्वीकृति से संशोधन’ की राजनीति में एक और उदाहरण बनकर रह जाएगा।