राजनांदगांव : खैरागढ़ में महतारी वंदन योजना में महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ई-केवाईसी के दौरान सामने आए एक मामले ने विभाग की सत्यापन व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। विभागीय लापरवाही का आलम यह रहा कि एक पुरुष का आवेदन महिला हितग्राही के रूप में स्वीकृत कर दिया गया और करीब एक वर्ष तक उसके खाते में योजना की राशि जारी होती रही। इसके बावजूद विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी को इस गंभीर त्रुटि का पता नहीं चला। मुढ़ीपार निवासी तिलोक साहू के आवेदन में हितग्राही और पति दोनों के कालम में एक ही व्यक्ति का नाम दर्ज था। इसके बावजूद संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सुपरवाइजर ने आवेदन का सत्यापन कर दिया। इसके बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने बिना किसी आपत्ति के आवेदन को स्वीकृति देते हुए लगातार किस्तें जारी कर दीं।
मामले के उजागर होने के बाद विभाग केवल राशि की वसूली की बात कर रहा है, लेकिन अब तक सत्यापन में लापरवाही बरतने वाले किसी भी कर्मचारी या अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है। इससे साफ है कि विभाग अपने ही कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने से बच रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आवेदन में स्पष्ट रूप से पुरुष का नाम दर्ज था और पति के स्थान पर भी वही नाम लिखा गया था, तो विभाग की दोहरी जांच व्यवस्था आखिर किस काम की रही। इससे महतारी वंदन योजना के सत्यापन तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया भी सवालों के घेरे में है। मामले की जानकारी लेने के लिए जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं पूरे मामले पर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण भी सामने नहीं आया। चर्चा यह भी है कि मामले की गंभीरता के बावजूद विभाग के जिम्मेदार अधिकारी हाल की टीएल बैठक में भी अनुपस्थित रहे, जिससे विभाग की कार्यशैली पर और सवाल उठ रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रक्रिया के अनुसार आवेदन पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा सत्यापित किया जाता है, फिर सुपरवाइजर उसकी जांच कर स्वीकृति देता है। तिलोक साहू के मामले में दोनों स्तरों पर आवेदन पास हो गया, जबकि हितग्राही और पति दोनों के नाम एक ही व्यक्ति के दर्ज थे। इतनी स्पष्ट त्रुटि का नजरअंदाज होना विभागीय जांच प्रणाली की गंभीर विफलता माना जा रहा है।