September 11, 2025


फ्रांस से नेपाल तक.... कब-कब सामाजिक बदलाव के वाहक रहे हैं छात्र आंदोलन?

नई दिल्ली:  नेपाल में छात्र प्रदर्शनों, जिन्हें अब जेन-जी विरोध प्रदर्शन कहा जा रहा है, ने इंटरनेट मीडिया बहाल करने के साथ पीएम ओली की सत्ता को भी उखाड़ फेंका। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, पूर्व से लेकर पश्चिम तक, आधुनिक इतिहास ऐसे छात्र आंदोलनों से भरा पड़ा है।

कभी वे सत्ता को गिराने में सफल हो जाते हैं, तो कभी सत्ता छात्रों को कुचल देती है। लेकिन हार के बाद भी, जेन-जी प्रदर्शनकारी अक्सर युगांतरकारी राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों के उत्प्रेरक बन जाते हैं। आइए ऐसे ही ऐतिहासिक छात्र आंदोलनों पर नजर डालते हैं...

1968 छात्र विद्रोह से बदल गया था फ्रांस

1968 में पेरिस के एक उपनगर में शुरू हुआ छात्र विद्रोह, जल्द ही एक आम हड़ताल से जुड़ गया। इसके बाद लगभग एक करोड़ मजदूर बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। पेरिस बीसवीं सदी के तीसरे दशक के बाद से सबसे भीषण दंगों की चपेट में था और पूरा फ्रांस थम सा गया था।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति चार्ल्स द गाल की सरकार तो बच गई, लेकिन फ्रांस हमेशा के लिए बदल गया। रूढ़िवादी गाल ने एक खुले, सहिष्णु और धर्मनिरपेक्ष समाज का मार्ग प्रशस्त किया, जहां वेतन काफी बेहतर था। 1968 की यह कहानी आज भी विद्रोही भावनाओं को प्रेरित करती है।

लैटिन अमेरिका

शैक्षिक असमानता और नवउदारवादी नीतियों के खिलाफ छात्रों के 2011-13 के चिली शीतकालीन प्रदर्शन से लेकर 1968 में मेक्सिको सिटी ओलिंपिक से पहले सत्तावाद के खिलाफ मैक्सिकन छात्र आंदोलन तक लैटिन अमेरिकी छात्र आंदोलनों की सूची काफी लंबी है।

इस आंदोलन को क्रूरतापूर्वक कुचल दिया गया था। इस सूची में सैन्य तानाशाही के खिलाफ अर्जेंटीना का प्रतिरोध, निकारागुआ में ओर्टेगा शासन को चुनौती जैसी कई घटनाएं शामिल हैं।

अमेरिका में भी उठती रही हैं छात्रों की आवाजें

अमेरिका में दुनिया के कुछ सबसे सक्रिय छात्र संगठन रहे हैं। इससे यह उम्मीद भी जगती है कि अभिव्यक्ति की आजादी पर ट्रंप के हमले आखिरकार नाकाम होंगे। बीसवीं सदी के छठें और सातवें दशक में छात्रों युद्ध, दोनों का विरोध किया था। छात्रों के रंगभेद विरोधी आंदोलन से सुदूर दक्षिण अफ्रीका में सुधार हुए। आज, अमेरिकी विश्वविद्यालय फलस्तीन-इजरायल संघर्ष को लेकर विभाजित दिख रहे हैं, लेकिन यह संभव है कि भविष्य में इस मुद्दे पर भी उनमें आम सहमति बन जाए।

1979 ईरान की इस्लामी क्रांति

1979 के ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी को उखाड़ फेंकने वाली इस्लामी क्रांति में विश्वविद्यालय के छात्र प्रमुख भागीदार थे। हाल के वर्षों में छात्रों ने उसी धर्मनिरपेक्षता और अमेरिका के साथ संबंधों के लिए विरोध प्रदर्शन किया है, जिसके खिलाफ वे पांच दशक पहले आंदोलन कर रहे थे।

अयातुल्ला अली खामेनेई का कठोर रुख भी ठीक उसी तरह का उकसावा है, जो किसी अचानक भड़कने वाली घटना की मदद से छात्र आंदोलन को गति दे सकता है।

1989 थ्येन आनमन चौक नरसंहार

1989 में, लोकतांत्रिक सुधारों और भ्रष्टाचार खत्म करने की मांग को लेकर छात्रों के नेतृत्व में थ्येनआनमन चौक सहित पूरे चीन में विरोध प्रदर्शन हुए थे। 3-4 जून की रात को सेन ने प्रदर्शनों का हिंसक दमन किया।

थ्येनआनमन चौक नरसंहार के नाम से जानी जाने वाली इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी। प्रदर्शन के दौरान सफेद कमीज, काली पतलून पहने और टैंकों को रोकते हुए अकेले व्यक्ति की चर्चित छवि आज भी कम्युनिस्ट दमन के प्रतिरोध की संभावना का संकेत देती हैं।


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