किरंदुल।लोहनगरी किरन्दुल में एटक द्वारा शिकागो में हुए मजदूर आंदोलन के शहीदों को याद करते हुए शुक्रवार अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पूरे जोश और सम्मान के साथ मनाया गया। 1886 में अमेरिका के शिकागो में मजदूरों ने 16 घंटे की कठोर मेहनत के खिलाफ आवाज उठाई थी, जहां 8 घंटे काम का अधिकार पाने की लड़ाई में कई मजदूरों ने अपनी जान कुर्बान कर दी। उसी संघर्ष की याद में आज दुनिया भर में मजदूर दिवस मनाया जाता है।
इसी कड़ी में दंतेवाड़ा के किरंदुल में एटक यूनियन द्वारा एक विशाल मोटरसाइकिल रैली निकाली गई। रैली की शुरुआत संयुक्त खदान मजदूर संघ यूनियन कार्यालय से हुई, जो पूरे नगर का भ्रमण करते हुए पुनः यूनियन कार्यालय में समाप्त हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में मजदूरों के साथ-साथ महिला मजदूरों की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
रैली के माध्यम से मजदूरों ने अपने अधिकारों और एकता का संदेश दिया, साथ ही शिकागो के शहीद मजदूरों के संघर्ष को याद किया, जिनकी कुर्बानी के चलते आज श्रमिकों को 8 घंटे काम करने का अधिकार मिला है।
शाम के समय डीएवी स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां गीत, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से मजदूर आंदोलन के इतिहास और उनके बलिदान को जीवंत किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज जो भी श्रमिक अधिकार हमें प्राप्त हैं, वे उन शहीदों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम हैं, जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता।
मजदूर दिवस का यह आयोजन न केवल एक उत्सव रहा, बल्कि श्रमिकों के अधिकारों, एकता और संघर्ष की याद दिलाने वाला प्रेरणादायक अवसर भी साबित हुआ।
किरंदुल संयुक्त खदान मजदूर संघ के सचिव राजेश संधू ने कहा की एक मई मजदूर के लिए बहुत बड़ा दिन है इस दिन को पूरे विश्व के मजदूर मानते है शिकागो के शहीद साथियों की कुर्बानी कभी भुलाई नही जा सकती उनके कारण ही हमको आज़ादी मिली 16 घंटे की जगह 8 घंटे काम करने की आज भी वही समय वापस लौट रहा है मजदूरो का हक छीनने की कोशिश की जा रही हैं।