राजनांदगांव: मिशनरी बेबस परिवारों की महिलाओं को निशाना बनाकर मतांतरण का रैकेट चला रहे हैं। मिशनरी पास्टर डेविड चाको प्रार्थना और चंगाई सभा की आड़ में ऐसी महिलाओं का ब्रेनवाश कर रहा है। जिसके बाद परिवारों को मतांतरित कर ईसाई धर्म से जोड़ा जा रहा है। अब राजनांदगांव ब्लाक के सोमनी में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। मतांतरण का यह तरीका द टिमोथी इनिशिएटिव (टीटीआइ) के माड्यूल का ही हिस्सा है। राजनांदगांव का मिशनरी पास्टर डेविड चाको इस संस्था का प्रशिक्षक रहा है।
पीडि़त सोमनी निवासी कमलदीप खंडेवार ने बताया कि उसका बड़ा बेटा मानसिक और छोटा बेटा शारीरिक रुप से विकलांग है। हमने उनके इलाज में 14 लाख रुपये खर्च किए पर वे ठीक नहीं हुए। पत्नी श्वेता एक परिवार के सहारे मिशनरियों के संपर्क में आई। वह डेविड चाको के नेहरु नगर और फिर धर्मापुर स्थित भवन में प्रार्थना, चंगाई सभाओं में जाने लगी तो मैं भी साथ जाता। उसने पत्नी को मतांतरण के लिए तैयार किया, तीन वर्ष पूर्व हम मतांतरित हो गए। लेकिन मुझे सच समझ आया और एक महीने पहले मैंने धर्म वापसी कर ली।
लेकिन धर्मवापसी के बाद अब मिशनरी डेविड चाको दोबारा ईसाई धर्म में लौटने का दबाव बना रहे है और इसके उसे धमकाया जा रहा है। पीडि़त का आरोप है कि मिशनरी उसकी पत्नी का इस्तेमाल कर रहा है। इसके चलते वह छोटे बेटे को लेकर घर छोड़ मायके चली गई है। वह ईसाई धर्म अपनाने पर जोर दे रही है। इस मतांतरण के जाल में उलझकर परिवार टूट रहा है। दोनों बेटों की देखरेख प्रभावित हो रही है। रोजी-मजदूरी करने वाले परिवार के सामने संकट खड़ा है।
नए कानून में कड़ी सजा का प्राविधान
इस पूरे मामले को लेकर पीडि़त ने तीन जून को एसपी के नाम लिखित शिकायत की है। उसने मिशनरी डेविड चाको के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कुछ महीनों पहले लागू हुआ छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक, 2026 में अनुसूचित जाति/जनजाति जैसे परिवारों के मतांतरण पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। यह मामला भी इसी दायरे में आता है।
मतांतरण का रैकेट चला रहे मिशनरी
मूलत: केरल निवासी मिशनरी पास्टर डेविड चाको के खिलाफ मतांतरण के मामले पर सुकुल दैहान पुलिस चौकी में अपराध दर्ज है जिसमें वह जेल जा चुका है और फिलहाल जमानत पर बाहर है। उसके लिंक प्रदेश भर में मतांतरण का रैकेट चलाने के मामले से भी जुड़े बताए जाते हैं। उसके तार द टिमोथी इनिशिएटिव (टीटीआइ) और इंडिया पेंटा कोस्टल चर्च से भी जुड़े हुए हैं। वह टीटाआइ के पाल ग्रुप का प्रशिक्षक रहा है जिसमें मतांतरण के लिए एक तरह से स्लीपर सेल तैयार किए जाते हैं। टीटीआइ पर मतांतरण के लिए विदेशी फंडिंग के इस्तेमाल के आरोपों पर भी ईडी की जांच जारी है।