June 29, 2026


बटुक भैरवी जयंती पर करें ये खास पूजा, नकारात्मक शक्तियां रहेंगी दूर, मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

सनातन धर्म में शाक्त और तंत्र परंपरा में गुप्त और अत्यंत शक्तिशाली शक्तियों की पूजा करने का खास महत्व है। इन्हीं महाशक्तियों में से एक शक्ति मां बटुक भैरवी भी हैं, जो भगवान शिव के बाल स्वरूप बटुक भैरव की आदिशक्ति हैं। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि को बटुक भैरवी जयंती को अत्यंत पवित्रता और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

इस वर्ष यह पावन जयंती 29 जून 2026, सोमवार के दिन मनाई जाएगी। इस दिन भक्त और तंत्र-मंत्र से जुड़े साधक अपने जीवन से डर, अकाल मृत्यु, तंत्र बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव चाहते हैं, तो उनके लिए यह दिन एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है। आइए जानते हैं बटुक भैरवी जयंती का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका आध्यात्मिक महत्व। बटुक भैरवी जयंती 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 28 जून 2026 को शाम 4 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर 29 जून 2026 को शाम 6 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी।उदयातिथि के हिसाब से सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि 29 जून 2026 सोमवार को होगी, इसलिए इसी दिन बटुक भैरवी जयंती का त्योहार जाएगा।

मां बटुक भैरवी कौन हैं?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जब ब्रह्मांड में नकारात्मक शक्तियों और असुरों का प्रकोप काफी ज्यादा बढ़ गया था, तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा हेतु आनंदभैरव (बटुक भैरव) का रूप धारण किया था। उन्हीं की शक्ति के रूप में मां आदिशक्ति ने बटुक भैरवी का रूप लिया।

मां का यह रूप सौम्य और उग्र दोनों का संतुलन रूप है। जहां एक ओर माता अपने भक्तों के लिए ममतामयी और कल्याणकारी हैं। वहीं दुष्ट और आसुरी शक्तियों के लिए वे काल की तरह हैं। इस दिन उनकी पूजा करने से कुंडली में राहु-केतु और शनि के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

मां बटुक भैरवी की पूजा कैसे करें?
मां बटुक भैरवी की पूजा करना बेहद सरल है। बस उनकी पूजा में शुद्धता और सात्विकता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

सुबह उठकर नहाने के बाद साफ कपड़े पहनें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। इसके बाद मां दुर्गा या मां भैरवी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इसके साथ ही भगवान शिव या बटुक भैरव की मूर्ति हो तो साथ में रखें।

इसके बाद माता को कुमकुम, लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल अर्पित करना चाहिए। भोग में मां को आम या सात्विक मिठाई और हलवा चढ़ाना चाहिए।

इसके बाद गाय के घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं। मां दुर्गा को नवार्ण मंत्र या भैरवी मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे मन शांत होता है। पूजा के बाद आखिर में मां की आरती करें और अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा मांगे।


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