वर्ष 2026 में मोहिनी एकादशी का पावन व्रत 27 अप्रैल, सोमवार को रखा जाएगा। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की यह तिथि ज्योतिष के अनुसार बहुत ही खास मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन चंद्रमा और शुक्र की स्थितियों का एक अनोखा योग बन रहा है।
मोहिनी एकादशी वह समय है जब भगवान विष्णु ने असुरों को भ्रमित करने के लिए अपना सबसे सुंदर और मोहक रूप धारण किया था। ज्योतिष शास्त्र में मोहिनी रूप का सीधा संबंध शुक्र ग्रह की आकर्षण शक्ति और चंद्रमा की चंचलता से जोड़कर देखा जाता है। जब हम इस पावन पर्व की तैयारी करते हैं, तो हमारे भीतर छिपी आध्यात्मिक शक्ति जागती है। यह तिथि हमें अनुशासन में रहने और अपने जीवन को सही दिशा में आगे बढ़ाने का एक अच्छा अवसर देती है।
प्रेम संबंधों में मधुरता और आकर्षण का प्रभावमोहिनी एकादशी पर शुक्र की ताकत प्रेम संबंधों में एक नई जान फूंकने का काम करती है। शुक्र ग्रह को सुंदरता, सुख और प्रेम का आधार माना गया है, जबकि चंद्रमा हमारे मन और भावनाओं को संभालता है। इस दिन का विशेष योग उन लोगों के लिए बहुत अच्छा साबित हो सकता है जो अपने रिश्तों को बेहतर बनाना चाहते हैं या किसी नए रिश्ते की शुरुआत करना चाहते हैं।
मोहिनी अवतार की ऊर्जा हमारे व्यक्तित्व में निखार लाती है, जिससे आपसी बातचीत बेहतर होती है। यदि आपके रिश्तों में पिछले कुछ समय से तनाव चल रहा है, तो इस दिन की गई पूजा और व्रत आपके मन को शांत कर रिश्तों में पुरानी मिठास वापस ला सकते हैं। यह समय जीवन में नई अच्छी ऊर्जा भरने का है।
शुक्र और चंद्रमा का साथ केवल भावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक प्रगति के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिष में शुक्र को भौतिक सुख-सुविधाओं और धन का स्वामी माना गया है। मोहिनी एकादशी के दिन जब चंद्रमा का प्रभाव शुक्र के साथ मिलता है, तो यह धन बचाने और निवेश के लिए अच्छी स्थितियां बनाता है। जो लोग काम-काज से जुड़े हैं, उनके लिए यह समय नई योजनाओं को लागू करने का है। इस पावन तिथि पर मदद करने और दान करने से धन की बढ़त होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि मानसिक शांति के साथ-साथ भौतिक प्रगति भी जीवन को सही तरह से चलाने के लिए जरूरी है।
मोहिनी एकादशी का व्रत हमारे मन को साफ करने और मन की बुराइयों को दूर करने का एक तरीका है। चंद्रमा के प्रभाव से मन में उठने वाली उथल-पुथल शांत होती है और शुक्र के प्रभाव से व्यक्ति के भरोसे में बढ़त होती है। यह संयोग हमें पुरानी बुरी यादों को पीछे छोड़कर एक नई शुरुआत करने का बल देता है।
पूजा और मंत्र जाप के जरिए हम अपने ध्यान को बढ़ा सकते हैं, जो हमारे कार्यक्षेत्र में सफलता दिलाने में मदद करता है। जब हम पूरी निष्ठा के साथ इस व्रत के नियमों को मानते हैं, तो हमारे स्वभाव में कोमलता और विचारों में साफ सुथरापन आता है। यह अनुशासन ही हमें आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है।