तीर्थ स्थल का प्रसाद कैसे करें ग्रहण?- जब भी कोई व्यक्ति तीर्थ से प्रसाद लेकर आए, तो अपने हाथों में लेकर इसे सबसे पहले प्रणाम करें।
- इसके लिए आप प्रसाद को माथे से लगाएं।
- फिर इसे पूजा स्थल या मंदिर में जाकर रखें, ताकि इसकी पवित्रता बनी रहे।
- इसके बाद इसे ग्रहण करें। इससे आपको भगवान को आशीर्वाद प्राप्त होगा।
तीर्थ स्थल का प्रसाद क्यों होता है खास?प्रसाद एक भाव होता है, जिसे पवित्र मन के साथ लाया जाता है। इसका भोग जब मंदिर में लगता है, तो यह और भी ज्यादा पवित्र हो जाता है। ऐसा कहा जाता है कि प्रसाद अगर सही तरीक से चढ़ाया जाता है, तो इसमें दैवीय ऊर्जा का संचार होता है। इसमें सात्विक और शुद्ध चीजों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि इसकी शुद्धता बनी रहे।
प्रसाद इसलिए भी खास होता है क्योंकि इसमें सात्विक गुण होते हैं, जो मन को शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है।
इन बातों का रखें ध्यानप्रसाद को कभी भी झूठे हाथों से न लें।
यदि प्रसाद खराब हो जाए या उसमें फफूंद लग जाए, तो उसे कूड़ेदान में न डालें। इसे आप पेड़ में डाल सकते हैं।
प्रसाद ग्रहण करने के बाद उसके पात्र को भी आदर के साथ धोना चाहिए। इसे तुरंत फेंकने के बजाय साफ कर लेना उत्तम माना जाता है।