March 29, 2026


ईरान युद्ध से 5 सीख: अमेरिका, भारत और अन्य देशों के मुकाबले चीन अपनी मिसाइल रक्षा प्रणाली को कर रहा मजबूत

नई दिल्ली : अमेरिका के ईरान पर सैन्य अभियान को शुरू में आसान माना गया था, लेकिन हफ्तों बाद भी स्थिति जटिल बनी हुई है। ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण कायम किए हुए है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। चीन इस युद्ध को संकट नहीं, बल्कि एक लैबोरेट्री के तौर पर देख रहा है। वह हर परिस्थितियों को करीब से निगरानी कर रहा है।

चीन की सेना के आधिकारिक मुखपत्र ‘चाइना मिलिट्री बगल’ ने इस युद्ध से पांच सबक निकाले हैं। ये सबक चीन की लंबी अवधि की अपनी सैन्य योजना बनाने के लिए है।

आंतरिक कमजोरी बर्दाश्त नहीं

पहला सबक आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा है। शी जिनपिंग के नेतृत्व में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) में बड़े पैमाने पर छंटनी चल रहा है। 2022 के बाद 47 में से 41 वरिष्ठ जनरलों की जांच या बर्खास्तगी हो चुकी है। ईरान युद्ध ने साबित किया कि हाई लेवल वाले युद्ध में आंतरिक कमजोरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

बातचीत से समाधान नहीं

दूसरा सबक कूटनीति को दर्शाता है। ईरान पर हमला कूटनीतिक प्रक्रिया के दौरान हुआ। चीन यह समझ गया है कि बातचीत करना किसी भी देश के लिए सुरक्षा की गारंटी नहीं है। इसलिए चीन ने 2026 के लिए अपना सैन्य बजट 7 प्रतिशत बढ़ाकर 1.91 ट्रिलियन युआन (लगभग 277 अरब डॉलर) कर दिया है।

ताकतवर दिखना जीत की गारंटी नहीं

तीसरा सबक यह है कि उसका अधिक ताकतवर दिखना ही उसकी सफलता की गारंटी नहीं है। अमेरिका और इजरायल की सटीक हमले की क्षमता प्रभावी साबित हुई, लेकिन उसे पूरी तरफ सफलता नहीं मिली। चीन अब एआई, टेक्नोलॉजी वॉर और आधुनिक हथियारों पर जोर दे रहा है।

बिना लक्ष्य के जीत संभव नहीं

चौथा सबक जीत के भ्रम से संबंधित है। ईरान के खिलाफ शुरुआती सफलता के बावजूद अमेरिका खास नियंत्रण हासिल नहीं कर पाया है। चीन को चेतावनी मिली है कि स्पष्ट राजनीतिक लक्ष्य के बिना युद्ध में जीत हासिल नहीं हो सकती है।

ईंधन की आत्मनिर्भरता जरूरी

पांचवां सबक आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। चीन की 45 प्रतिशत तेल आपूर्ति हॉर्मुज से होकर जाती है। इस युद्ध ने चीन को रणनीतिक संसाधनों के स्टॉक रखने और सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित किया है।

इसके अलावा, ईरान युद्ध ने मिसाइल हमलों की भारी मात्रा और मिसाइल रक्षा प्रणालियों की कमियों को उजागर किया है। चीन अब बूस्ट-फेज इंटरसेप्शन पर फोकस कर रहा है, जिसमें मिसाइल लॉन्च के तुरंत बाद ही उन्हें नष्ट करना जरूरी है। यह नीति न केवल अमेरिका बल्कि भारत की अग्नि सीरीज समेत कई देशों के मिसाइल खतरे के खिलाफ तैयार की जा रही है।


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