June 07, 2026


Adhik Maas Shivratri 2026: 27 साल बाद बन रहा महासंयोग, जानें तारीख, पूजा मुहूर्त, शुभ योग और महत्व

मासिक शिवरात्रि का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। मास शिवरात्रि का व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन महादेव और मां गौरी की उपासना के लिए अति उत्तम माना जाता है।  इस साल ज्येष्ठ माह में आने वाली मासिक शिवरात्रि अधिक मास में पड़ेगी, जिस वजह से इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।  मासिक शिवरात्रि पर करीब 27 साल बाद महासंयोग बन रहा है। ऐसे में इस दिन भोलेनाथ की पूजा करने से बिल्कुल भी न चूकें। तो यहां जानिए अधिक मासिक शिवरात्रि की तारीख, शुभ मुहूर्त और योग के बारे में।

अधिक मासिक शिवरात्रि 2026 व्रत तारीख 

पंचांग के अनुसार, , ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 13 जून को शाम 4 बजकर 7 मिनट पर होगा।  कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का समापन 14 जून को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर होगा। अधिक मास का मासिक शिवरात्रि का व्रत 13 जून 2026 को रखा जाएगा।

अधिक मासिक शिवरात्रि 2026 व्रत शुभ मुहूर्त

शिवरात्रि की पूजा के लिए प्रदोष काल और निशिता काल सबसे उत्तम और शुभ माना जाता है। अधिक मासिक शिवरात्रि के दिन प्रदोष काल मुहूर्त शाम को 6 बजकर 34 मिनट से लेकर 8 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। वहीं निशिता काल मुहूर्त देर रात 12 बजकर 7 मिनट से रात 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।

अधिक मासिक शिवरात्रि 2026 महासंयोग

ज्येष्ठ के अधिक मास में मासिक शिवरात्रि का महासंयोग करीब 27 साल बाद बना है। वहीं इस बार चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में गोचर करेंगे, जिससे गौरी योग का निर्माण होगा। यह योग वैवाहिक जीवन में खुशहाली, पारिवारिक सुख-समृद्धि और हर मनोकामना को पूरा करने वाला माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती की एक साथ पूजा करने से उनका विशेष आशीर्वाद मिलता है। वहीं अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित माह है। ऐसे में मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव के साथ विष्णु जी की पूजा करना भी अत्यंत ही फलदायी होगा।

अधिक मासिक शिवरात्रि व्रत महत्व

मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से कुंडली में चंद्र दोष दूर होता है और चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। इसके साथ ही राहु-केतु के बुरे प्रभाव और शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से पीड़ित जातकों को भारी राहत मिलती है। वहीं धार्मिक मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत रख कर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही उनके विवाह का शीघ्र योग भी बनता है।


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