क्या है अधिक पूर्णिमा?हिंदू कैलेंडर के अनुसार, सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच 11 दिनों का अंतर आता है। इसी संतुलन बनाए रखने के लिए हर तीसरे साल (लगभग ढाई से तीन वर्ष के अंतराल पर) एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इसे ही 'अधिक मास', 'मलमास' या 'पुरुषोत्तम मास' कहा जाता है। इस अत्यंत पावन महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा को ही 'अधिक पूर्णिमा' कहा जाता है, जो कई वर्षों के इंतजार के बाद आती है।
भगवान विष्णु से है सीधा संबंधश्रीविष्णु सहस्रनाम के अनुसार, भगवान विष्णु का एक दिव्य नाम 'पुरुषोत्तम' भी है, जिसका अर्थ है—'पुरुषों में उत्तम'। शास्त्रों के अनुसार, इस अतिरिक्त मास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु हैं, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। चूंकि यह पूर्णिमा स्वयं श्रीहरि के प्रिय महीने में आती है, इसलिए इस दिन की गई पूजा से भगवान विष्णु के साथ-साथ साधक को माता लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिलता है। यही कारण है कि इसे सामान्य पूर्णिमा से कहीं अधिक प्रभावशाली माना गया है।