राजनांदगांव: आज के डिजिटल दौर में साइबर ठग लोगों को ठगने के लिए लगातार नए तरीके खोज रहे हैं। पहले जहां ओटीपी बैंक काल और फर्जी लिंक के जरिए ठगी की जाती थी, वहीं अब अपराधियों ने लोगों के बायोमेट्रिक डेटा यानी चेहरे और आंखों की जानकारी को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। नौकरी आफर, ई-केवाईसी और वीडियो वेरिफिकेशन के नाम पर लोगों का फेस स्कैन कर उनके आधार और बैंक खातों तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही है। साइबर शाखा में हाल के कई मामलों में सामने आया है कि ठग पहले लोगों को किसी बड़ी कंपनी में नौकरी का आफर भेजते हैं। इसके बाद इंटरव्यू प्रक्रिया के नाम पर वीडियो काल या किसी मोबाइल ऐप के जरिए फेस और आई स्कैनिंग करवाई जाती है। कई लोग इसे सामान्य प्रक्रिया समझकर बिना सोचे-समझे अपनी बायोमेट्रिक जानकारी साझा कर देते हैं। बता दें कि इसके पहले भी साइबर ठग पीएम आवास, पीएम किसान सम्मान निधि सहित अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने लोगों को फर्जी लिंक और एपीके फाइल भेज चुके हैं।
कैसे काम करता है यह नया साइबर फ्राड
साइबर अपराधी पहले लोगों का विश्वास जीतते हैं। वे नौकरी, बैंक अपडेट, केवाईसी या सरकारी प्रक्रिया के नाम पर लिंक भेजते हैं। इसके बाद वीडियो काल या ऐप के माध्यम से चेहरे और आंखों का डेटा इकट्ठा किया जाता है। कई बार नकली ऐप डाउनलोड करवाकर मोबाइल की निजी जानकारी भी चुरा ली जाती है। यदि किसी व्यक्ति का आधार लिंक मोबाइल नंबर बदल दिया जाए, तो अपराधी बैंक खाते, ओटीपी, नेट बैंकिंग और अन्य डिजिटल सेवाओं तक पहुंच बना सकते हैं। इससे आर्थिक नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है।
राजनांदगांव रहने वाले 27 वर्षीय अमित सिंह (बदला हुआ नाम) पिछले कुछ महीनों से नौकरी की तलाश कर रहे थे। एक दिन उन्हें एक प्रतिष्ठित कंपनी के नाम से ईमेल मिला, जिसमें आकर्षक वेतन पर नौकरी का आफर दिया गया था। ईमेल में इंटरव्यू के लिए एक लिंक भेजा गया। लिंक पर क्लिक करने के बाद अमित की वीडियो काल के जरिए डिजिटल वेरिफिकेशन प्रक्रिया करवाई गई। काल करने वाले व्यक्ति ने कहा कि कंपनी सुरक्षा कारणों से फेस स्कैन और आई वेरिफिकेशन कर रही है। अमित ने कैमरे के सामने चेहरा घुमाया और निर्देशों का पालन किया। अगले दो दिनों तक सब सामान्य रहा, लेकिन तीसरे दिन उनके मोबाइल पर आधार से जुड़े मोबाइल नंबर अपडेट होने का संदेश आया। कुछ देर बाद बैंक खाते से कई ट्रांजेक्शन होने लगे और देखते ही देखते खाते से हजारों रुपये गायब हो गए। जब अमित ने बैंक और साइबर सेल से संपर्क किया, तब पता चला कि साइबर अपराधियों ने उनके बायोमेट्रिक डेटा का इस्तेमाल कर आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदलने की कोशिश की थी। इसी के जरिए बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बनाई गई।
इस तरह रहें सतर्क
किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
वीडियो काल पर फेस स्कैन या आई वेरिफिकेशन से बचें।
बैंक, आधार या सरकारी एजेंसियां फोन पर संवेदनशील जानकारी नहीं मांगतीं।
मोबाइल पर आने वाले ओटीपी और बैंक अलर्ट को नजरअंदाज न करें।
संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
आधार और बैंकिंग ऐप्स में नियमित रूप से सुरक्षा सेटिंग जांचते रहें।
वर्जन
डिजिटल दुनिया में जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। थोड़ी सी सावधानी आपकी मेहनत की कमाई और निजी पहचान दोनों को सुरक्षित रख सकती है। साइबर अपराध से बचाव के लिए लगातार जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
कीर्तन राठौर, एएसपी