राजनांदगांव :- प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन दुकानों में मोबाइल ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण बंद किए जाने के बाद राशन वितरण व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। केवल बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) के माध्यम से राशन दिए जाने की व्यवस्था से उपभोक्ताओं और राशन दुकान संचालकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से वितरण प्रक्रिया धीमी हो गई है जिससे रोजमर्रा की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।
शहर सहित जिले की अधिकांश उचित मूल्य दुकानों में इन दिनों राशन लेने आने वाले हितग्राहियों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। पहले जहां मोबाइल ओटीपी के माध्यम से आसानी से राशन वितरण हो जाता था वहीं अब केवल फिंगरप्रिंट से सत्यापन की अनिवार्यता के कारण प्रक्रिया में काफी समय लग रहा है। दुकान संचालकों का कहना है कि कई बुजुर्गों, मजदूरों और दिव्यांग हितग्राहियों के फिंगरप्रिंट मशीन में सही तरीके से नहीं आते। कई बार सर्वर की धीमी गति और नेटवर्क की समस्या के कारण घंटों तक राशन वितरण बाधित रहता है। ऐसे में न तो हितग्राहियों को समय पर राशन मिल पाता है और न ही दुकानदार निर्धारित समय में वितरण कार्य पूरा कर पाते हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से भी लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि फिंगरप्रिंट मिलान नहीं होने के कारण कई पात्र हितग्राहियों को बार-बार दुकान के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे मजदूरी करने वाले लोगों की रोजी-रोटी भी प्रभावित हो रही है क्योंकि उन्हें राशन लेने के लिए काम छोड़कर कई बार आना पड़ता है। राशन दुकानदारों का कहना है कि यदि मोबाइल ओटीपी की सुविधा पुनः शुरू कर दी जाए तो जिन हितग्राहियों के फिंगरप्रिंट मैच नहीं होते उन्हें भी आसानी से राशन मिल सकेगा और वितरण प्रक्रिया भी तेज होगी। उनका कहना है कि देश के कई राज्यों में बायोमेट्रिक के साथ ओटीपी का विकल्प उपलब्ध है जिससे उपभोक्ताओं और दुकानदारों दोनों को राहत मिलती है। राशन कार्डधारियों ने भी मांग की है कि छत्तीसगढ़ में भी अन्य राज्यों की तरह फिंगरप्रिंट के साथ मोबाइल ओटीपी का विकल्प उपलब्ध कराया जाए ताकि किसी भी तकनीकी परेशानी की स्थिति में पात्र हितग्राही राशन से वंचित न रहें। इधर सरकार के इस निर्णय को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। उपभोक्ताओं और राशन विक्रेताओं का कहना है कि व्यवस्था में सुधार के बजाय ओटीपी सुविधा बंद करने से अनावश्यक परेशानियां बढ़ गई हैं। उन्होंने शासन से जनहित को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार कर जल्द से जल्द ओटीपी आधारित वैकल्पिक व्यवस्था पुनः लागू करने की मांग की है।
जिला खाद्य अधिकारी रविंद्र सोनी ने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशों के अनुरूप सार्वजनिक वितरण प्रणाली में राशन वितरण की प्रक्रिया लागू की जा रही है। उन्होंने बताया कि 60 वर्ष से अधिक आयु के हितग्राहियों तथा 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए ओटीपी की सुविधा उपलब्ध है। वहीं जो हितग्राही रोजगार या अन्य कारणों से दूसरे राज्यों में रह रहे हैं वे वन नेशन वन राशन कार्ड' योजना के तहत वहां भी अपना राशन प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि ओटीपी सुविधा बंद होने के कारण आम हितग्राहियों को कुछ असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।