राजनांदगांव: स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 के तहत केंद्रीय दल ने बुधवार से शहर में मैदानी निरीक्षण शुरू कर दिया। दो अलग-अलग दलों में पहुंची टीम ने पहले दिन चिखली, शंकरपुर और स्टेशनपारा क्षेत्र का दौरा कर सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक शौचालय, नालियों, सड़क, पेयजल व्यवस्था और सुंदरीकरण कार्यों का जायजा लिया। कुल छह सदस्यीय दल सर्वेक्षण के लिए यहां पहुंचा है।
निरीक्षण के दौरान टीम ने केवल व्यवस्थाओं को नहीं परखा, बल्कि नागरिकों से सीधे बातचीत कर फीडबैक भी लिया। सर्वेक्षण की पूरी प्रक्रिया जीपीएस आधारित है। टीम पोर्टल से जनरेट होने वाले स्थानों पर पहुंचकर मौके की तस्वीरें और वीडियो अपलोड कर रही है। नगर निगम ने सर्वेक्षण से पहले एमआइएस पोर्टल में सफाई व्यवस्था, कचरा निष्पादन, ट्रेंचिंग ग्राउंड, सार्वजनिक सुविधाओं और सुंदरीकरण संबंधी स्व-घोषणा रिपोर्ट अपलोड की थी। अब केंद्रीय टीम इन्हीं दावों की जमीनी स्थिति का सत्यापन कर रही है।
स्वच्छता सर्वेक्षण में इस बार डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण, वैज्ञानिक तरीके से कचरा निष्पादन, सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति और नागरिक संतुष्टि को सबसे महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। सर्वेक्षण में नागरिकों के फीडबैक को भी अहम महत्व दिया जा रहा है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार हर वार्ड में प्रभारियों को पूरे दिन सक्रिय रहने और सफाई व्यवस्था पर लगातार नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। जहां भी कमियां मिल रही हैं, वहां तत्काल सुधार कराया जा रहा है।
तैयारियों में छह करोड़ खर्च किए
नगर निगम पिछले तीन महीनों से सर्वेक्षण की तैयारी में जुटा था। निगम ने करीब छह करोड़ रुपये खर्च कर शहर के विभिन्न चौक-चौराहों और मुक्कड़ों का सुंदरीकरण कराया है। पाथवे निर्माण, डस्टबीन वितरण, ट्रेंचिंग ग्राउंड में जमा पुराने कचरे के निस्तारण और सफाई व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है।
कई नए मापदंड जोड़े, सभी साइट का दौरा करेगी टीम
स्वच्छता सर्वेक्षण टूलकिट के अनुसार इस बार केवल सड़क और नालियों की सफाई ही नहीं, बल्कि सैनिटरी वेस्ट, सीएंडडी वेस्ट, आरआरआर सेंटर, स्कूलों की स्वच्छता, सामुदायिक शौचालय, मूत्रालय और सीवेज प्रबंधन की भी विस्तृत जांच की जाएगी। निरीक्षण के दौरान टीम कचरा प्रसंस्करण केंद्रों, सार्वजनिक शौचालयों, स्कूलों और लैंडफिल साइटों तक का दौरा करेगी।
12 हजार अंकों का होगा स्वच्छता सर्वेक्षण
स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 में शहरों की रैंकिंग कुल 12 हजार अंकों के आधार पर तय की जाएगी। इसमें सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, सीवेज सिस्टम, सार्वजनिक शौचालय, नागरिक फीडबैक और मैदानी निरीक्षण को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। केंद्रीय टीम द्वारा मैदानी जांच, दस्तावेज सत्यापन और नागरिकों से सीधे बातचीत के आधार पर अंक दिए जाएंगे। स्वच्छता सर्वेक्षण टूलकिट के अनुसार सार्वजनिक शौचालयों के लिए 300, सामुदायिक शौचालयों के लिए 300, मूत्रालयों के लिए 150 और खुले में शौच रोकथाम के लिए 100 अंक निर्धारित किए गए हैं। वहीं सीवेज और फीकल स्लज प्रबंधन के लिए कुल एक हजार अंक रखे गए हैं।
इस तरह तय होंगे अंक
-डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और पृथक्करण : घरों से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र करने तथा उसके वैज्ञानिक निष्पादन पर अंक मिलेंगे।
-कचरा प्रसंस्करण और ट्रेंचिंग ग्राउंड : शहर में निकलने वाले कचरे का कितना प्रतिशत वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस हो रहा है, इसकी जांच की जाएगी।
-सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालय : सार्वजनिक शौचालयों की साफ-सफाई, पानी, रखरखाव और उपयोगिता के आधार पर अंक दिए जाएंगे।
-सीवेज और फीकल स्लज प्रबंधन : बंद सीवेज सिस्टम, सीवेज ट्रीटमेंट और गंदे पानी के वैज्ञानिक निस्तारण को भी रैंकिंग में शामिल किया गया है।
-नागरिक फीडबैक : नागरिकों की संतुष्टि इस बार सबसे अहम मानी जा रही है। केंद्रीय टीम सीधे लोगों से सफाई और सुविधाओं को लेकर राय ले रही है।
-मैदानी निरीक्षण और जीपीएस मानिटरिंग : टीम पोर्टल से तय स्थानों पर पहुंचकर फोटो और वीडियो अपलोड कर रही है। मौके की स्थिति के आधार पर अंक तय होंगे।