January 11, 2026


मकर संक्रांति के दिन राशि अनुसार जपें ये गुप्त मंत्र, सूर्य की तरह चमकेगी आपकी किस्मत

वैदिक पंचांग के अनुसार, बुधवार 14 जनवरी को मकर संक्रांति है। इस शुभ अवसर पर आत्मा के कारक सूर्य देव राशि परिवर्तन करेंगे। 14 जनवरी को सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में गोचर करेंगे। सूर्य देव के राशि परिवर्तन करने की तिथि पर मकर संक्रांति मनाई जाएगी।

सनातन धर्म में संक्रांति तिथि का खास महत्व है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुण्यदायिन गंगा समेत पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं। इसके बाद विधि-विधान से सूर्य देव की पूजा करते हैं। सूर्य देव की पूजा करने से आरोग्यता का वरदान मिलता है। साथ ही करियर संबंधी परेशानी दूर होती है।

अगर आप भी सूर्य देव को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो मकर संक्रांति के दिन (Makar Sankranti 2026 Zodiac Remedies) गंगा स्नान कर भक्ति भाव से सूर्य देव और मां गंगा की पूजा करें। साथ ही पूजा के समय राशि अनुसार इन मंत्रों का जप करें। वहीं, पूजा का समापन सूर्य देव की आरती से करें।

राशि अनुसार मंत्र जप 
  1. मेष राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन 'ॐ गंगायै नमः और ॐ अरुणाय नमः' मंत्र का जप करें।
  2. वृषभ राशि के जातक संक्रांति के दिन 'ॐ अनलायै नमः और ॐ शरण्याय नमः' मंत्र का जप करें।
  3. मिथुन राशि के जातक मकर संक्रांति पर 'ॐ अव्ययायै नमः और ॐ आदित्याय नमः ' मंत्र का जप करें।
  4. कर्क राशि के जातक संक्रांति के दिन 'ॐ उमासपत्न्यै नमः और ॐ अच्युताय नमः' मंत्र का जप करें।
  5. सिंह राशि वाले सूर्य देव की कृपा पाने के दिन 'ॐ त्रिवेण्यै नमः और ॐ अनन्ताय नमः'मंत्र का जप करें।
  6. कन्या राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन 'ॐ जयायै नमः और ॐ विश्वरूपाय नमः' मंत्र का जप करें।
  7. तुला राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन 'ॐ सावित्र्यै नमः और ॐ भानवे नमः' मंत्र का जप करें।
  8. वृश्चिक राशि के जातक संक्रांति के दिन ' ॐ जगन्मात्रे नमः और ॐ ईशाय नमः' मंत्र का जप करें।
  9. धनु राशि के जातक संक्रांति के दिन 'ॐ नन्दिन्यै नमः और ॐ सुप्रसन्नाय नमः' मंत्र का जप करें।
  10. मकर राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन 'ॐ शरण्यै नमः और ॐ वसुप्रदाय नमः' मंत्र का जप करें।
  11. कुंभ राशि के जातक मकर संक्रांति के दिन 'ॐ अनन्तायै नमः और ॐ वासुदेवाय नमः' मंत्र का जप करें।
  12. मीन राशि के जातक मकर संक्रांति पर 'ॐ पूर्णायै नमः और ॐ उज्ज्वलाय नमः ' मंत्र का जप करें।
॥ आरती श्री सूर्य जी ॥

जय कश्यप-नन्दन,ॐ जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन - तिमिर - निकन्दन,भक्त-हृदय-चन्दन॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सप्त-अश्वरथ राजित,एक चक्रधारी।
दुःखहारी, सुखकारी,मानस-मल-हारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सुर - मुनि - भूसुर - वन्दित,विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर,दिव्य किरण माली॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सकल - सुकर्म - प्रसविता,सविता शुभकारी।
विश्व-विलोचन मोचन,भव-बन्धन भारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
कमल-समूह विकासक,नाशक त्रय तापा।
सेवत साहज हरतअति मनसिज-संतापा॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
नेत्र-व्याधि हर सुरवर,भू-पीड़ा-हारी।
वृष्टि विमोचन संतत,परहित व्रतधारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सूर्यदेव करुणाकर,अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान-मोह सब,तत्त्वज्ञान दीजै॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।


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