सात जन्मों का बंधनहिंदू धर्म में सात के अंक को बहुत पवित्र माना गया है। जैसे शादी के समय सात फेरे लेकर सात जन्मों का साथ निभाने का वचन दिया जाता है, वैसे ही बरगद पर 7 बार कच्चा सूत लपेटना इस बात का प्रतीक है कि पति-पत्नी का रिश्ता सात जन्मों तक अटूट बना रहे।
त्रिदेवों का वासशास्त्रों के अनुसार, बरगद के वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव का वास होता है, जब महिलाएं वृक्ष पर सूत लपेटती हैं, तो वे एक तरह से त्रिदेवों को साक्षी मानकर अपने सुहाग की रक्षा का वचन मांगती हैं। यह धागा एक रक्षा सूत्र की तरह काम करता है।
सावित्री के संकल्प का प्रतीकसूत का धागा कच्चा होता है, लेकिन जब इसे कई बार लपेटा जाता है, तो यह बहुत मजबूत हो जाता है, जो इस बात को दिखाता है कि प्यार और विश्वास का धागा भले ही नाजुक हो, लेकिन संकल्प की शक्ति उसे अटूट बना देती है, जैसा सावित्री का संकल्प था।
परिक्रमा का महत्ववृक्ष की परिक्रमा करना पवित्र ऊर्जा पाने का एक तरीका है। कहते हैं कि बरगद का पेड़ सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होता है। परिक्रमा करते समय महिलाएं मौन रहकर या मंत्रोच्चार करते हुए अपने परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं, जिससे उनकी मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है।