राजनांदगांव: खैरागढ़ क्षेत्र के लक्षना जंगल के दल्लीखोली वन क्षेत्र में वन्यजीवों की संदिग्ध मौत के मामले में वन विभाग ने जांच और तेज कर दी है। कक्ष क्रमांक 322 स्थित झिरिया (जल स्रोत) से पानी के नमूने एकत्रित कर राजधानी स्थित फारेंसिक लैब भेजे गए हैं। विभाग को आशंका है कि जल स्रोत में किसी विषैले पदार्थ की मिलावट की गई हो सकती है, हालांकि भीषण गर्मी और हीट स्ट्रोक की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। 25 मई को दल्लीखोली क्षेत्र में मोर, उल्लू, कबरबिज्जू समेत कई वन्यजीव मृत अवस्था में पाए गए थे। घटना की जानकारी मिलते ही वन अमला मौके पर पहुंचा और झिरिया के आसपास के क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। जांच पूरी होने तक जल स्रोत को सील कर वहां निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि अन्य वन्यजीव प्रभावित न हों।
लैब से रिपोर्ट की प्रतीक्षा
वरिष्ठ अधिकारियों और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। पोस्टमार्टम के दौरान मृत वन्यजीवों के विसरा सुरक्षित रखे गए, वहीं झिरिया के पानी के सैंपल भी परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। अब लैब रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि जिस स्थान पर मृत वन्यजीव मिले, वहां गर्मी के दिनों में बड़ी संख्या में पक्षी और जंगली जानवर पानी पीने पहुंचते हैं। ऐसे में यदि पानी दूषित हुआ होगा तो इसका असर कई जीवों पर पड़ सकता है। वन विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए आसपास के वन क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद यदि जहर मिलाने की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।