May 08, 2026


क्या अधूरी इच्छाओं के कारण भटकती हैं आत्माएं? जानें मृत्यु के बाद का रहस्य

हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में से एक गरुड़ पुराण है, जिसमें मृत्यु और उसके बाद की स्थिति के बारे में विस्तार से बताया गया है। जब किसी व्यक्ति के प्राण निकलते हैं, तो वह केवल शरीर का अंत होता है, आत्मा का नहीं।

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा उसके कर्मों और मोह-माया के बंधनों पर निर्भर करती है, तो आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि आखिर मरने के बाद आत्मा का क्या होता है?

मृत्यु के ठीक बाद का सफर
गरुड़ पुराण के अनुसार, जब आत्मा शरीर छोड़ती है, तो उसे लेने के लिए यमराज के दूत आते हैं। वे आत्मा को यमलोक ले जाते हैं, जहां उसके जीवनभर के पापों और पुण्यों का हिसाब होता है।

इसके बाद आत्मा को फिर उसके घर छोड़ दिया जाता है, जहां वह 13 दिनों तक अपने परिजनों के बीच रहती है। यही वजह है कि हिंदू धर्म में तेरहवीं का विधान है, ताकि आत्मा को शांति मिले और वह आगे की यात्रा के लिए तैयार हो सके।

इच्छाएं और प्रेत योनि का रहस्य

गरुड़ पुराण कहता है कि अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय कोई गहरी इच्छा अधूरी रह जाए, या उसे अपने परिवार, धन या शरीर से अत्यधिक मोह हो, तो उसकी आत्मा सांसारिक बंधनों में फंस जाती है। ऐसी स्थिति में आत्मा प्रेत योनि में चली जाती है और धरती पर भटकती रहती है।

अकाल मृत्यु यानी दुर्घटना, आत्महत्या आदि के मामलों में भी आत्मा को तब तक शांति नहीं मिलती जब तक उसका तय किया हुआ समय चक्र पूरा नहीं हो जाता।

अच्छे कर्मों का फल यहां मिलता है

यमलोक की यात्रा बहुत कठिन मानी गई है। बीच में 'वैतरणी' नाम की एक भयानक नदी आती है, जिसे पार करना केवल उन्हीं के लिए आसान होता है, जिन्होंने जीवन में गोदान यानी की गाय का दान या अन्य कोई पुण्य कर्म किए हों। पापी आत्माओं के लिए यह मार्ग बहुत कठिन और यातनाओं से भरा होता है।


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