राजनांदगांव: वन चेतना केंद्र मनगटा क्षेत्र में डेढ़ सौ एकड़ क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग और अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद भू-स्वामियों में हड़कंप है। कृषि भूमि में ही व्यावसायिक और आवासीय निर्माण कराने वालों में बुलडोजर का डर ऐसा सताने लगा कि डायवर्सन के लिए अब तहसील कार्यालय तक दौड़ लगा रहे हैं। ताकि तोड़फोड़ से बचा जा सके। उधर ग्राम पंचायत से बिजली, पानी व अन्य सुवलिधाओं के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र मांग रहे हैं। बताया गया कि एक सप्ताह के भीतर डायवर्सन से लगभग 50 आवेदन लग चुके हैं। हालांकि प्रशासन ने अभी वहां की जमीनों का डायवर्सन प्रक्रिया रोक रखी है।
मनगटा क्षेत्र में लगभग दो सौ रिसोर्ट संचालित हैं। अधिकांश रिसोर्ट कृषि जमीन पर ही है जिसके लिए अनुमति तो दूर डायवर्सन भी नहींं कराया गया है। इस बीच वहां पिकनिक स्पाट क्षेत्र को आवासीय कालोनियों के रूप में भी विकसित किया जाने लगा था। इसके लिए दुर्ग-भिलाई के तीन भू-माफियों ने मनगटा, झूराडबरी, बघेरा और जोरातरई गांव के खेतों को मिनी सिटी की तरह सारे नियमोंं को ताक पर रखा था। मैरिज हाल, पक्की सड़क, नाली, तालाब, उद्यान आदि का निर्माण कराया जा रहा था। अकेले लगभग 10 एकड़ में ही मैरिज हाल बनाया जा रहा था। इसके लिए बडे़-बड़े प्रवेश द्वार बनाए गए थे। टुकड़ों में प्लटिंग कर कालोनी बसाई जा रही थी। पिछले सप्ताह ही वहां प्रशासन ने बुलडोजर चलवाकर सारे ढांचोंं को ध्वस्त कर दिया। इतना ही नहीं दो और भू-स्वामियों को नोटिस जारी कर वहां भी बुलडोजर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे हड़बड़ाए रिसोर्ट संचालकों के साथ ही अन्य लोग भी डायवर्सन के लिए तहसील कार्यालय में दौड़ लगा रहे हैं। हालांकि एसडीएम गौतम पाटिल ने बताया कि मनगटा क्षेत्र में अभी किसी भी जमीन का डायवर्सन नहीं किया जा रहा। उच्च अधिकारियों के दिशा-निर्देश के आधार पर ही इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
शपथ पत्र के साथ देनी होगी अवैध प्लाटिंग की जानकारी
शहर ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी जमकर अवैध प्लाटिंग हो रही है। कृषि भूमि पर निर्माण कराए जा रहेे हैं। कई जगह शासकीय जमीन भी दबाई जा रही है। वन चेतना केंद्र मनगटा में डेढ़ सौ एकड़ क्षेत्रफल में अवैध प्लाटिंग में वहां के पटवारी की भूमिका सामने आने के बाद प्रशासन ने अब पूरे जिले से अवैध प्लाटिंग की जानकारी लेनी शुरू कर दी है। संबंधित पटवारी को शपथ पत्र के साथ इसका डाटा मांगा गया है। ताकि उसके आधार पर कार्रवाई तय की जा सके। गलत जानकारी या तथ्य छिपाने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही जा रही है।
निलंबन के साथ बर्खास्तगी का भी है प्रविधान
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत किसी भी शासकीय कर्मचारी का आचरण नियम के विपरित पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही यदि कोई कर्मचारी कदाचार (करप्शन) या नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय जांच के बाद बर्खास्त भी किया जा सकता है। मनगटा मामले में पटवारी की भूमिका को इसी श्रेणी में माना जा रहा है। पहले नोटिस का जवाब नहीं मिला है। अंतिम नोटिस के बाद कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन यह भी जांच रहा है कि ग्राम पंचायत की इसमें क्या भूमिका है।