घटस्थापना के साथ ही नौ दिनों तक चलने वाली देवी साधना की विधिवत शुरुआत मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सही मुहूर्त में की गई घटस्थापना साधना को सफल और फलदायी बनाती है। माघ नवरात्र में यह प्रक्रिया विशेष रूप से साधना प्रधान मानी जाती है, इसलिए इसके नियम और समय को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है।
घटस्थापना को देवी शक्ति के आवाहन का प्रतीक माना गया है। कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक कहा गया है, जिसमें जल, पंच तत्व और देवी की चेतना का वास माना जाता है। माघ नवरात्र के दौरान घटस्थापना का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह नवरात्र गुप्त साधना से जुड़ा होता है।
मान्यता है कि घटस्थापना के माध्यम से साधक देवी को अपने जीवन और साधना स्थल में आमंत्रित करता है। यही कारण है कि इसे केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि साधना का आधार माना गया है। इस प्रक्रिया में शुद्धता, श्रद्धा और नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक बताया गया है।
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार घटस्थापना प्रतिपदा तिथि में की जाती है। माघ नवरात्र (Gupt Navratri 2026) में घटस्थापना के लिए सूर्योदय के बाद का समय शुभ माना गया है। विशेष रूप से अभिजीत मुहूर्त या प्रतिपदा के शुभ काल में घटस्थापना करने की परंपरा है।
यह भी माना जाता है कि रात्रि काल में घटस्थापना से बचना चाहिए। पंचांग में तिथि, नक्षत्र और योग को ध्यान में रखकर शुभ समय का निर्धारण किया जाता है। गुप्त नवरात्र साधना प्रधान होने के कारण साधक प्रायः गुरु या पंचांग के मार्गदर्शन में मुहूर्त का चयन करते हैं।
घटस्थापना की विधि और आवश्यक सावधानियां