राजनांदगांव :- विकासखंड डोंगरगांव अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला खपरीकला में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए गुरु वंदना, प्रेरक विचार और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। शिक्षकों ने गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को जीवन में शिक्षा, संस्कार और अनुशासन का संदेश दिया।
विकासखंड डोंगरगांव के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला खपरीकला में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ छात्र-छात्राओं द्वारा भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। विद्यालय परिसर भक्तिमय माहौल से गूंज उठा और विद्यार्थियों ने गुरुजनों के प्रति अपनी कृतज्ञता एवं सम्मान प्रकट किया। इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को रेखांकित करते हुए गुरुजनों के प्रति आदर व्यक्त किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षक श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु ही अपने ज्ञान, अनुभव और संस्कारों से शिष्य के जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं तथा अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों के बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने गुरु वंदना, प्रेरणादायक विचार, कविता पाठ एवं मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने गुरुजनों के आदर्शों का अनुसरण करने, शिक्षा के प्रति समर्पित रहने तथा सदैव ज्ञानार्जन के पथ पर आगे बढ़ने का सामूहिक संकल्प लिया। गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन विद्यालय में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और गुरु-शिष्य परंपरा को सशक्त बनाने का प्रेरणादायी अवसर बन गया।