राजनांदगांव :- ग्राम उसरीबोड़ में सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण को लेकर विवाद गहरा गया है। मंगलवार को करीब 200 ग्रामीण एसडीएम कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर उपसरपंच द्वारा लगाए गए अर्थदंड के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा मामला सरकारी घास भूमि एवं मुक्तिधाम की जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को भटकाने का प्रयास है। वहीं सरपंच के विभिन्न कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की भी मांग की गई है।
ग्राम उसरीबोड़ के बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को ज्ञापन सौंपकर बताया कि कार्यालय के पत्र क्रमांक 1550 दिनांक 27 जुलाई 2026 के संदर्भ में उपसरपंच देवराज निषाद द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह असत्य एवं भ्रामक हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि सरपंच द्वारा 31 हजार रुपए तथा दो पंचों द्वारा 21 हजार रुपए का अर्थदंड लेने संबंधी लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में सार्वजनिक घास भूमि एवं मुक्तिधाम की भूमि पर हुए अवैध कब्जों को हटाने के लिए ग्राम पंचायत एवं ग्रामवासियों ने सामूहिक निर्णय लिया था। इस निर्णय का पालन करते हुए अधिकांश अतिक्रमणकारियों ने स्वयं अपने कब्जे हटा लिए लेकिन उपसरपंच देवराज निषाद ने कथित रूप से पंचायत पद का प्रभाव दिखाते हुए अतिक्रमण हटाने से इंकार कर दिया। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि उपसरपंच ने करीब 9 डिसमील शासकीय घास भूमि पर मकान एवं अन्य निर्माण कर लगभग 12 वर्षों से कब्जा कर रखा है। ग्रामीणों का कहना है कि उक्त भूमि गांव के मुक्तिधाम के लिए आरक्षित है जिसके कारण अंतिम संस्कार एवं शव दफनाने के लिए ग्रामीणों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि 26 सितंबर 2025 को कलेक्टर जनदर्शन में की गई शिकायत के बाद हल्का पटवारी ने मौके की जांच कर खसरा नंबर 717, रकबा 2.027 हेक्टेयर में सार्वजनिक सड़क एवं घास भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि करते हुए पंचनामा तैयार किया था। इसके आधार पर एसडीएम कार्यालय से करीब छह माह पूर्व ग्राम पंचायत को अतिक्रमण हटाने के निर्देश भी जारी किए गए थे। पंचायत द्वारा शासन के नियमानुसार उपसरपंच को तीन बार नोटिस भी जारी किए जाने का दावा किया गया है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उपसरपंच पूर्व में अतिक्रमणकारियों के नाम से फर्जी हस्ताक्षर कर शिकायत प्रस्तुत कर चुके हैं जिसे उन्होंने बाद में ग्रामीणों की बैठक में स्वीकार भी किया था। ज्ञापन में सरपंच श्रीमती मनीषा साहू पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उपसरपंच को बचाने के प्रयास में सरपंच द्वारा मिनी स्टेडियम, पानी निकासी तालाब एवं बिजली लाइन जैसे विकास कार्यों में भ्रष्टाचार किया गया है जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि सरपंच एवं उपसरपंच मिलकर प्रशासन को गुमराह करने तथा अतिक्रमण के मूल मुद्दे से ध्यान हटाने का प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीणों ने एसडीएम से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है। ज्ञापन सौंपने के दौरान ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष टिकेश कुमार साहू सहित देव कुमार साहू, भोजराम साहू, प्रकाश चंद्र साहू, अंगेश्वर साहू, गोपीराम ठाकुर, राम फागुराम, आनंद, मोहन, चंद्रभान साहू, रितेश, चेतन, धनेंद्र, ओमप्रकाश साहू, तिजूराम, धनुराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। करीब 200 ग्रामीणों के साथ एसडीएम कार्यालय पहुंचे प्रतिनिधिमंडल को एसडीएम ने मामले की जांच कर नियमानुसार उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।