राजनांदगांव: राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में लान्ग एशिया पर फारेक्स ट्रेडिंग ट्रेप में फंसे निवेशकों से ठगी के मामले में नए राज सामने आए हैं। इस स्कीम में 500 अमेरिकन डालर से निवेश शुरु होता था। फारेक्स ट्रेडिंग में 10 महीने में रकम दोगुनी करने का वायदा किया गया था। जनवरी 2026 तक निवेशकों ने इसका फायदा भी उठाया। लेकिन इसके बाद मुनाफे के साथ ही मूल रकम निकालने का विकल्प भी बंद कर दिया गया। यह रकम सिर्फ एप पर दिखाई देती रही। इस ट्रेडिंग ट्रेप का घोटाला 200-300 करोड़ से अधिक होने की आशंका है।
रकम की निकासी बंद होने के बाद ही निवेशकों में हड़कंप शुरु हो गया था। अंतत: एक दूसरे से परिचित अलग-अलग राज्यों के निवेशक में डोंगरगढ़ में उन व्यक्तियों से मुलाकात के लिए एक साथ पहुंचे थे जिन्होंने उन्हें निवेश की फोरक्स ट्रेडिंग स्कीम से जोड़ा था। इस पूरे मामले में कुलजीत सिंह भाटिया, जोगेंद्र वर्मा, और अभय कुंडले के नाम सामने आए हैं। इन्होंने पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली तक अपना जाल फैलाया हुआ था।
ठगी के देशभर में फैले जाल की शुरुआत एक्सटीबी इंटरनेशनल लिमिटेड के नाम पर की गई थी। इसे दो बार बदला गया। एक्सटीबी के बाद इसे एफसीएक्स इंटरनेशनल लिमिटेड के नाम से संचालित करने के बाद आखिर में लान्ग एशिया ग्रुप एनजी लिमिटेड में मर्ज कर दिया गया। अब भी ये सवाल बना हुआ है कि जिन लोगों के नाम सामने आए हैं क्या वे ही इसे संचालित कर रहे थे या उनके पीछे कोई और नेटवर्क काम कर रहा था।
होटलों में होते थे सेमीनार, बेबीलान में हुआ था सम्मेलन
पिछले दिनों यहां अलग-अलग राज्यों से जुटे निवेशकों ने जो जानकारी दी कि उसके अनुसार फारेक्स ट्रेडिंग की यह चेन सिर्फ इंटरनेट मीडिया एप और समूह तक सीमित नहीं थी। निवेश कराने वाले व्यक्तियों द्वारा अलग-अलग राज्यों में सेमीनार और बैठकें भी की गई। निवेशकों के मुताबिक रायपुर के होटल बेबीलान में भी निवेशकों की एक बैठक आयोजित हुई थी जिसमें कई राज्यों से लोग शामिल हुए थे।
मामला फूटा लेकिन एफआइआर नहीं, आरोपितों ने शहर छोड़ा
पूरा मामला स्पष्ट होने के बाद भी अब तक उन व्यक्तियों के खिलाफ जांच शुरु नहीं हो सकी है जिन पर ठगी के आरोप लग रहे हैं। पुलिस के मुताबिक अब तक उन्हें कोई वैध शिकायत नहीं मिली है। हालांकि 24 जुलाई को निवेशकों के जुटने और विषय सामने के बाद जांच की बात कह रही है। इधर,पड़ताल में सामने आया कि निवेशकों ने जिनके नाम लिए थे, वह शहर छोड़ चुके हैं।