राजनांदगांव : बहुत बड़े पैमाने पर होता है जिसमे करोड़ो रूपये की हेरा फेरी की जाती है,,, इसमें यदि नुकसान होता है तो सिर्फ भूमालिक गरीब किसान और सरकार का जिसे टैक्स नही दिया जाता.
छत्तीसगड़ में यह खेल अभी नया है जो 10 ,,12 सालों से चल रहा है इसमें गरीब किसान के अच्छे जमीन को औने पौने पैसे देकर कर 1 से 2साल के लिय एग्रीमेट कराया जाता है ....जैसे यदि 1 एकड़ जमीन है तो उसे 50 हजार देकर 20 हजार प्रति डिसमिल के हिसाब से एग्रीमेंट कराया जाएगा यानी कुल मूल्य 20 लाख होगी जिसे दलाल आदिवासी है तो जमीन को किसी अन्य आदिवासी के नाम से एग्रीमेंट( मुख्तियारनामा) बनवाएगा। फिर उस जमीन को 1 लाख प्रति डिसमिल में बेचेगा.
यानी कुल मूल्य 1 करोड़,अब उसे एक साल में टुकड़ों में बेच कर किसान को 20 लाख दे देगा और भूमाफिया को 80 लाख मिलेगा वो भी कैश में(सरकार को बिना टैक्स दिए ब्लैक मनी),,,यानी समझ लो 50 हजार दे कर दलाल ने 80 लाख कमा लिए पूरा काम कैश में होगा,,,यानी सरकार से टैक्स की चोरी,,,आज कल काला धन बचाने का सबसे आसान तरीका है ये,,,सोचो बेचारा किसान कई बार इन दल्लो के बीच कई साल तक पिसते रहते है,,,, ज्यादातर आदिवासी किसान ऐसे मामलो में फसते है क्योंकि आदिवासी जमीन सिर्फ आदिवासी ही खरीद सकता है,,,,रियाल स्टेट का यह काला बाजार इतना बड़ा है की आपके और हमारे कल्पना से कही अधि0 ,,,,, भू माफिया अवैध रूप से जमीन बेच बेच.
भोले भाले किसानों को लूट कर लाल हो I अवैध प्लाटिंग का खेल किसानों के नाम से ही विक्रेता को रजिस्ट्री करा देते हैं और दलाल अपना नाम नहीं फसाते जैसे-जैसे जमीन बिकती है वैसे-वैसे किसानों को पैसा दे देते कुल मिलाकर राजनांदगांव के चारों दिशाओं में अवैध प्लाटिंग चल रही है नाम मात्र की कार्रवाई होती है फिर सेटल हो जाता है वह भी.