January 28, 2026


जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत, दांपत्य जीवन में खुशहाली के लिए ऐसे करें पूजा

 हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। जब यह व्रत शुक्रवार को पड़ता है, तो इसे 'शुक्र प्रदोष' कहा जाता है। शुक्र प्रदोष व्रत 30 जनवरी को रखा जाएगा। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के साथ-साथ सुख-समृद्धि और सौभाग्य के लिए भी बेहद खास माना जाता है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सूर्यास्त के समय जब दिन और रात का मिलन होता है, उसे 'प्रदोष काल' कहा जाता है। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न होकर नृत्य करते हैं। उस वक्त सभी देवी-देवता उनकी स्तुति कर रहे होते हैं। शुक्र प्रदोष के दिन अगर कोई भक्त निष्काम भाव से शिव-शक्ति की संयुक्त रूप से पूजा करता है, तो उसे 100 गायों के दान के बराबर पुण्य फल मिलता है। यह समय ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है। इसलिए, इस दौरान किया गया ध्यान और मंत्र जाप सीधे महादेव तक पहुंचता है। और, आपके जीवन की नकारात्मकता जड़ से खत्म हो जाती है।

प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत का संबंध भौतिक सुखों और ऐश्वर्य के स्वामी 'शुक्र' ग्रह से भी है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और आर्थिक परेशानियां समाप्त होती हैं।

30 जनवरी 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त
इस साल 30 जनवरी को माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा शाम के समय यानी 'प्रदोष काल' में की जाती है। ज्योतिष गणना के अनुसार, पूजा के लिए सबसे उत्तम समय सूर्यास्त के लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद तक का होता है। इस दिन शाम को शिव आराधना करने से सोया हुआ भाग्य भी जाग उठता है।

पंचांग के अनुसार, 30 जनवरी को सुबह 11 बजकर 09 मिनट पर माघ शुक्ल त्रयोदशी तिथि शुरू होगी और अगले दिन 31 जनवरी को सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर इसका समापन होगा। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 59 मिनट से रात 8 बजकर 37 मिनट तक रहेगा।

पूजा की सही विधि स्नान और संकल्प:और सफेद रंग के वस्त्र धारण करें (शुक्र प्रदोष पर सफेद रंग शुभ माना जाता है)। व्रत का संकल्प लें।

शिव अभिषेक: प्रदोष काल (शाम) में दोबारा स्नान कर शिव मंदिर जाएं या घर पर ही शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।

भोग और श्रृंगार: महादेव को बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं।

मंत्र और आरती: 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें और शुक्र प्रदोष की कथा सुनें या पढ़ें। अंत में आरती कर क्षमा याचना करें।

शुक्र प्रदोष पर जरूर करें ये उपायअगर आपके जीवन में धन की कमी है या वैवाहिक जीवन में तनाव है, तो इस दिन शिवलिंग पर अक्षत (बिना टूटे चावल) और शक्कर चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है।


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