राजनांदगांव :- वरिष्ठ भाजपा नेता शिव वर्मा ने कहा महापौर की लोकप्रियता की चिंता छोड़कर शहर के विकास पर ध्यान दें संतोष पिल्ले, बिना पूरी जानकारी के भेदभाव का आरोप लगाना उचित नहीं।
नगर निगम में विकास कार्यों के लिए राशि के आवंटन को लेकर नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले द्वारा महापौर मधुसूदन यादव पर कांग्रेस पार्षदों के वार्डों के साथ सौतेला व्यवहार करने के लगाए गए आरोपों पर वरिष्ठ भाजपा नेता शिव वर्मा ने पलटवार किया है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के बयान को निराधार बताते हुए कहा कि बिना पूरी सच्चाई जाने विकास कार्यों में भेदभाव का आरोप लगाना उचित नहीं है। महापौर मधुसूदन यादव शहर के सभी वार्डों को समान दृष्टि से देखते हैं और क्षेत्र की जरूरतों, पार्षदों की मांग तथा स्थानीय समस्याओं के आधार पर विकास कार्यों के लिए राशि उपलब्ध कराई जाती है। श्री वर्मा ने कहा कि महापौर की लोकप्रियता को लेकर नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। महापौर का दायित्व पूरे नगर निगम क्षेत्र का विकास करना है और वे अपनी जिम्मेदारी के अनुरूप सभी वार्डों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर काम कर रहे हैं। ऐसे में यह कहना कि कांग्रेस पार्षदों के वार्डों के साथ जानबूझकर भेदभाव किया जा रहा है, वास्तविक स्थिति को जाने बिना दिया गया बयान है। श्री वर्मा ने नेता प्रतिपक्ष के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उन्हें वास्तव में विकास कार्यों के आवंटन को लेकर कोई आपत्ति है, तो उन्हें पूरी जानकारी के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संतोष पिल्ले ने अपने बयान में वार्ड क्रमांक 17, 11 और 29 का उल्लेख किया है, लेकिन सवाल यह है कि उन्होंने केवल इन्हीं तीन वार्डों का जिक्र क्यों किया? क्या नगर निगम के अन्य वार्डों की आवश्यकताओं और वहां चल रहे विकास कार्यों की जानकारी उन्होंने ली है? श्री वर्मा ने कहा कि किसी भी वार्ड में विकास कार्यों की आवश्यकता का आकलन वहां की समस्याओं, नागरिकों की मांग और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किया जाता है। केवल कुछ वार्डों का उल्लेख करके पूरे नगर निगम में भेदभाव होने का आरोप लगाना उचित नहीं है। यदि किसी वार्ड में कोई समस्या है, तो संबंधित पार्षद को उसे महापौर के संज्ञान में लाना चाहिए। समस्या की प्रकृति और आवश्यकता के अनुसार उसके समाधान के लिए प्रयास किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति और राशि आवंटन की प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए। जनता के बीच अधूरी जानकारी के आधार पर आरोप लगाने के बजाय उन्हें वार्डों की समस्याओं के समाधान के लिए रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। श्री वर्मा ने कहा कि महापौर मधुसूदन यादव, राजनांदगांव के विधायक डॉ. रमन सिंह और सांसद संतोष पांडे क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देते हैं। विकास कार्यों में किसी पार्षद के राजनीतिक दल को आधार बनाकर निर्णय नहीं लिया जाता, बल्कि संबंधित वार्ड की आवश्यकता और मांग को ध्यान में रखकर कामों को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने कहा कि नगर निगम के सभी 51 वार्ड शहर का अभिन्न हिस्सा हैं। प्रत्येक वार्ड में नागरिकों को सड़क, नाली, पेयजल, सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता होती है। इन सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। इसलिए विकास कार्यों को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय जनहित के दृष्टिकोण से देखना चाहिए। श्री वर्मा के अनुसार, यदि किसी वार्ड में सड़क, नाली या पेयजल से संबंधित समस्या है तो उस समस्या के समाधान के लिए आवश्यकतानुसार कदम उठाए जाते हैं। विकास राशि का उपयोग भी वार्ड की जरूरतों और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर किया जाता है। उन्होंने कहा कि किसी वार्ड में कांग्रेस का पार्षद होने मात्र से वहां विकास कार्यों को रोकने का कोई सवाल ही नहीं उठता। श्री वर्मा ने कहा कि महापौर मधुसूदन यादव बजट निर्माण और विकास कार्यों की प्राथमिकताओं को लेकर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सभी पार्षदों के सुझावों और मांगों पर चर्चा करते हैं। पार्षद अपने-अपने वार्ड की समस्याओं और आवश्यकताओं से महापौर को अवगत कराते हैं, जिन पर गंभीरता से विचार किया जाता है। उन्होंने कहा कि वार्डों में विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करते समय स्थानीय परिस्थितियों और नागरिकों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है। पार्षदों द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता देने का प्रयास किया जाता है। इसका उद्देश्य यह है कि नगर निगम के संसाधनों का उपयोग जनहित में हो और वार्डों की समस्याओं का समाधान किया जा सके। श्री वर्मा ने कहा कि नगर निगम का बजट केवल किसी एक राजनीतिक दल के पार्षदों के लिए नहीं होता। इसका उद्देश्य पूरे शहर का विकास करना है। इसलिए बजट और विकास कार्यों को लेकर सभी पार्षदों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। ऐसे में यह आरोप लगाना कि महापौर केवल भाजपा पार्षदों के वार्डों में ही विकास कार्य करा रहे हैं, वास्तविक प्रक्रिया की पूरी जानकारी के बिना लगाया गया आरोप है। श्री वर्मा ने कहा कि प्रत्येक वार्ड की भौगोलिक स्थिति, आबादी, मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता और स्थानीय समस्याएं अलग-अलग होती हैं। किसी वार्ड में सड़क निर्माण की आवश्यकता हो सकती है, तो किसी अन्य वार्ड में नाली, पेयजल या सफाई से जुड़ी समस्या प्राथमिकता हो सकती है। ऐसे में सभी वार्डों में एक समान राशि खर्च करना ही समान विकास का एकमात्र पैमाना नहीं हो सकता।।उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए राशि का आवंटन क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए। जिस वार्ड में जिस प्रकार के कार्य की जरूरत है, उसके आधार पर प्राथमिकता निर्धारित की जाती है। महापौर का प्रयास रहता है कि नागरिकों की समस्याओं का समाधान हो और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग जरूरत के अनुसार किया जाए। श्री वर्मा ने कहा कि यदि नेता प्रतिपक्ष को किसी विशेष वार्ड में विकास कार्य नहीं होने की शिकायत है, तो उन्हें संबंधित समस्या, प्रस्ताव और आवश्यकता के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। इससे समस्या का समाधान निकालने में मदद मिलेगी। केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से वार्ड की समस्याएं दूर नहीं होंगी। नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले द्वारा अधोसंरचना मद से स्वीकृत 11 करोड़ 20 लाख 66 हजार रुपये की राशि को लेकर उठाए गए सवालों पर शिव वर्मा ने कहा कि किसी भी विकास राशि के संबंध में टिप्पणी करने से पहले उसके आवंटन, प्रस्तावित कार्यों और संबंधित वार्डों की जानकारी लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि नेता प्रतिपक्ष को लगता है कि किसी वार्ड के साथ अन्याय हुआ है, तो उन्हें ठोस तथ्यों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। नगर निगम में विकास कार्यों के लिए राशि का उपयोग शहर की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। किसी राशि का उल्लेख कर यह निष्कर्ष निकाल लेना कि उसका लाभ केवल एक राजनीतिक दल के पार्षदों को दिया जा रहा है, उचित नहीं है। श्री वर्मा ने कहा कि विकास कार्यों को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है, लेकिन इन विषयों पर चर्चा तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए। यदि किसी वार्ड में काम की आवश्यकता है, तो उसकी मांग और प्रस्ताव के अनुसार उचित प्रक्रिया अपनाकर समाधान निकालने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। श्री वर्मा ने कहा कि नगर निगम में निर्वाचित सभी पार्षदों का उद्देश्य अपने-अपने वार्डों की समस्याओं का समाधान करना और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए। सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों की जिम्मेदारी है कि वे जनहित के मुद्दों को सामने लाएं और विकास कार्यों में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन शहर के विकास और नागरिकों की सुविधाओं के मामले में सभी जनप्रतिनिधियों को सकारात्मक सोच के साथ काम करना चाहिए। किसी वार्ड में समस्या होने पर उसका समाधान प्राथमिकता से होना चाहिए, चाहे वहां किसी भी राजनीतिक दल का पार्षद निर्वाचित हुआ हो। श्री वर्मा ने कहा कि महापौर मधुसूदन यादव सभी वार्डों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में उनके कार्यों पर सवाल उठाने से पहले संबंधित तथ्यों की जानकारी लेना जरूरी है। अंत में शिव वर्मा ने कहा कि राजनांदगांव नगर निगम के सभी 51 वार्डों का विकास सामूहिक जिम्मेदारी है। विकास कार्यों में पारदर्शिता, जरूरत और जनहित को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। नेता प्रतिपक्ष को भी अधूरी जानकारी के आधार पर आरोप लगाने के बजाय वार्डों की वास्तविक समस्याओं को सामने लाकर उनके समाधान के लिए सहयोग करना चाहिए, ताकि शहर के विकास को गति मिल सके।