राजनांदगांव : जीवन में असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ते रहना चाहिए। संघर्ष ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है। यह बात मुनि श्रेयांशप्रभ सागर ने ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में कही।
मुनि ने कहा कि हर महान व्यक्ति के पीछे संघर्ष की कहानी होती है। कुछ लोग संपन्न होने के बावजूद दूसरों की सहायता करते हैं, जबकि कुछ के पास स्वयं बहुत कम होने पर भी वे दूसरों को देते हैं। ऐसे लोग अपने त्याग और सेवा से प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि सीखने के लिए हमेशा तैयार रहें और समय की कीमत समझकर उसका सदुपयोग करें।
मुनि श्रेयांशप्रभ सागर ने कहा कि परिस्थितियों का सामना करना हमारे ऊपर निर्भर करता है। हमें उनसे सीखना चाहिए, न कि केवल उनके अनुरूप ढल जाना चाहिए। विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और साहस बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जीवन सीमित है, इसलिए ऐसा काम करना चाहिए कि हमारे जाने के बाद भी लोग हमें याद रखें। अल्फ्रेड नोबेल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति का योगदान उसे लंबे समय तक स्मरणीय बनाता है। मुनि ने श्रेष्ठ आचरण अपनाने की सीख देते हुए कहा कि दूसरों से जैसा व्यवहार अपेक्षित करते हैं, वैसा ही व्यवहार स्वयं भी करें। हमारा आचरण ऐसा होना चाहिए कि दूसरे हमसे प्रेरणा लें और हमें अपना आदर्श मानें। मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने यह जानकारी दी।