राजनांदगांव: झुराडबरी पंचायत के मनगटा क्षेत्र में डेढ़ सौ एकड़ क्षेत्र कृषि भूमि पर बिना किसी अनुमति के आवासीय और व्यावसायिक निर्माण से भू-माफियों द्वारा शासन को राजस्व के रूप में बड़ा नुकसान पहुंचाया गया। अवैध रूप से मिनी सिटी बसाने क्षेत्र में 400 से 500 रुपये प्रति वर्गफीट के भाव से जमीन बेची गई है। यानी लगभग 225 करोड़ रुपये का सौदा। अगर इतनी जमीन का डायवर्जन कराया जाता तो शासन के खजाने कम के कम 18 करोड़ रुपये तो आते ही। विकास शुल्क के रूप में भी इससे कहीं अधिक राशि खजाने में जमा होती। इस तरह राजस्व के मैदानी अमलों की मिलीभगत से भूमाफियों ने शासन को 36 लाख रुपये की चपत लगाई है। वहां जिले की अब तक की सबसे बड़ी बुलडोजर कार्रवाई के बाद प्रशासन आने वाले दिनों में और बड़े एक्शन की तैयारी में है।
अय्याशी के अड्ढे बन चुके मनगटा में तेजी से रिसोर्ट बनाए जा रहे हैं। पूरा क्षेत्र बड़े पिकनिक स्पाट के रूप में विकसित हो गया है। इस कारण जमीन की कीमत भी तेजी से बढ़ रही है। इसी का फायदा उठाते हुए दुर्ग-भिलाई के भूमाफियाें ने वहां कांग्रेस शासन काल में कई जमीन को खरीदने के बाद उसे आवासीय बताकर न केवल टुकड़ों में बेच दी, बल्कि स्वयं शासकीय जमीन पर भी कब्जा कर लिया। किसानों से औने-पौने भाव में खरीदी गई जमीन को बिना अनुमति विकसित कर लिया गया। इस तरह शासन को राजस्व के रूप में चपत उसकी संपत्ति का भी नुकसान पहुंचाया गया। पिछले सप्ताह प्रशासन ने वहां अब तक की सबसे बड़ी तोड़फोड़ कार्रवाई कर स्पष्ट संदेश दे दिया है कि इस तरह की गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
नहीं मिला जवाब, फिर बड़ी कार्रवाई की तैयारी
मनगटा क्षेत्र में बुलडोजर कार्रवाई के बाद भू-माफियोे में हड़कंप मचा है। आसपास इलाके में भी कई जगह कृषि भूमि पर इसी तरह आवासीय व व्यवसायिक निर्माण के साथ ही शासकीय जमीन पर कब्जे की शिकायत है। दो स्थानाें का राजस्व रिकार्ड का मिलान कर लिया गया जहां अवैध प्लाटिंग की गई है। इसके बाद प्रशासन ने संबंधितों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था, लेकिन अब तक जवाब नहीं मिला है। साथ ही पूर्व में जारी नोटिस का भी कई भू-स्वामियों ने जवाब नहीं दिया है। ऐसे लोगों के खिलाफ फिर बुलडोजर चलाने की तैयारी है।
लंबे समय से जमे पटवारी का गोलमोल जवाब, होगी कार्रवाई
अवैध प्लाटिंग और शासकीय जमीन पर अतिक्रमण कर अवैध निर्माण को लेकर तहसीलदार प्यारेलाल नाग ने हल्का नंबर 18 में लमबे समय से पदस्थ पटवारी धनसिंग कोमरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। दो दिनों के भीतर जवाब मांगा गया था। एसडीएम गौतम पाटिल ने बताया कि पटवारी का जवाब संतुष्टजनक नहीं ंहै। प्रतिवेदन कलेक्टर को भेज दिया गया है। बताया गया कि अवैध प्लाटिंग और बिना सक्षम अनुमति के वहां धड़ल्ले से निर्माण होता रहा, लेकिन पटवारी ने उच्च अधिकारियों को कभी कोई सूचना नहींं दी। प्रशासन उन पर कड़ी कार्रवाई कर सकता है।