March 06, 2024


शिव महापुराण कथा के चौथे दिन शिव पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया

बिलाईगढ़ :- बिलाईगढ़ समीपस्थ ग्राम धनसीर के सिद्ध बाबा शक्तिपीठ शिवडोंगरी में श्री शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर कथा वाचक सुश्री देवकुमारी देवी जी ने शिव विवाह की कथा सुनाई। उन्होने कहा कि आत्मा का परमात्मा से मिलन ही शिव में लीन हो जाना है। भगवान शंकर वैराग्य के देवता माने गए हैं परंतु शिव ने विवाह कर संसार को गृहस्थ आश्रम में रहकर भी वैराग्य व योग धर्म करने का अनुसरण करने का तरीका सिखाया। भगवान शिव के वाहक नंदी एवं पार्वती का वाहन शेर है। शिव के गले में सर्प रहते हैं

जो सभी विपरीत विचारधारा के बीच सामंजस्य रखना ही शिवपुराण सिखाता है। भगवान के विवाह के वर्णन में मैनादेवी व हिमालय राज की पुत्री के रूप में मां पार्वती का जन्म लेना। प्रारंभिक काल में शिव की तपस्या करना। उसी दौरान तारका सुर के आतंक को खत्म करने के लिए शिव का तंद्रा भंग हुई तब जाकर शिव पार्वती का विवाह हुआ। उनकी शादी में सभी देवता मौजूद थे ही, साथ ही असुर भी वहां पहुंचे। सभी श्रोतागण जप हर हर हर महादेव गीत पर सभी मंत्रमुग्ध होकर झूमने लगे और भगवान भोलेनाथ की जय जयकार करने लगे। शिव के वेश में धनसीर निवासी महेन्द्र कुमार मरावी की सुपुत्री संजना मरावी एवं पार्वती के रूप में पंडरीपानी निवासी मोहन साहू की सुपुत्री सुष्मिता साहू जी बहुत ही सुन्दर दिखाई दे रहे थे।

भगवान शिव व पार्वती के स्वरूप में उन दोनों को उनके माता पिता एवं श्रद्धालुओं द्वारा आशीर्वाद प्रदान किया गया।कथा सुनने के लिए जांजगीर चांपा जिले के नरियरा, मिरौनी, बिर्रा आदि गांवों से श्रद्धालुजन पहुंचे हुए थे । प्रत्येक दिवस कथा श्रवण हेतु दूर दराज तथा आस पास सहित ग्रामवासी भक्त एवं श्रद्धालुजन बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।


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