राजनांदगांव : किसी ने आपके लिए कुछ किया है तो उसका उपकार कभी न भूलें। समय आने पर उसके प्रति कृतज्ञता जताएं और उपकार का प्रतिदान अवश्य करें। दूसरों की सहायता भी इस भाव से करें कि उसका प्रदर्शन न हो। समयप्रभ सागर ने चातुर्मासिक प्रवचन में ये विचार व्यक्त किए।
ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चल रहे प्रवचन में समयप्रभ सागर ने कहा कि जल्दबाजी में किए गए कार्यों में गलतियां होने की आशंका रहती है। इसलिए किसी भी काम को उतावलेपन में करने के बजाय सोच-समझकर करना चाहिए। उन्होंने आत्मप्रशंसा से बचने की सीख भी दी।
उन्होंने कहा कि संत अपनी प्रवृत्ति नहीं छोड़ता, उसी तरह दुर्जन भी अपना स्वभाव नहीं छोड़ता। उपकारी व्यक्ति भी अपने स्वभाव के अनुरूप दूसरों की सहायता करता है। उन्होंने कहा कि किसी का उपकार मानना और उसके प्रति कृतज्ञ रहना जीवन के महत्वपूर्ण गुण हैं। समयप्रभ सागर ने कहा कि साधर्मी दया का नहीं, बल्कि भक्ति का पात्र होता है। किसी जरूरतमंद की सहायता करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसका बखान न हो। निस्वार्थ भाव से किया गया सहयोग ही सच्चे सेवा भाव को दर्शाता है। मीडिया प्रभारी विमल हाजरा ने बताया कि ज्ञान वल्लभ उपाश्रय भवन में चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं।