हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन जब बात अधिकमास माह में आने वाली पद्मिनी एकादशी की हो, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। तीन साल में एक बार आने की वजह से इस एकादशी को बहुत दुर्लभ और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला माना गया है।
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन जब बात अधिकमास माह में आने वाली पद्मिनी एकादशी की हो, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। तीन साल में एक बार आने की वजह से इस एकादशी को बहुत दुर्लभ और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला माना गया है।
भगवान विष्णु की कृपा दिलाने वाले इस व्रत के नियम अन्य एकादशी से अधिक कठिन होते हैं। कई बार श्रद्धालु अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं,
जिससे उनका व्रत टूट जाता है या उन्हें पूजा का पूरा फल नहीं मिलता। अगर आप भी इस पावन तिथि पर उपवास रख रहे हैं, तो नियमों को जरूर जान लें, जो इस प्रकार हैं -
भूलकर भी न करें ये बड़ी गलतियां
एकादशी के दिन घर में चावल बनाना और खाना पूरी तरह वर्जित है। इसके अलावा, व्रत रखने वाले व्यक्ति को और घर के अन्य सदस्यों को भी इस दिन लहसुन, प्याज, मांस या मदिरा जैसे तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए।
भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के अधूरी मानी जाती है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करना और उनके पत्ते तोड़ना सख्त मना होता है। पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
एकादशी का व्रत केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक भी होता है। इस दिन इस दिन किसी पर गुस्सा करना, अपशब्द बोलना, झूठ बोलना या किसी की चुगली करना आपके व्रत के पुण्यों को पूरी तरह नष्ट कर सकता है।
व्रत के दौरान क्या करना है जरूरी?
पूजा मंत्र1.
कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात्।
करोमि यद्यत् सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि।।
2. ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।
3. शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशंविश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभांगम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।