July 29, 2026


जितनी आनलाइन अटेंडेंस उतना वेतन : वेतन पर मंडरा रहा खतरा डीपीआइ के आदेश से बढ़ी नाराजगी

राजनांदगांव: आनलाइन अटेंडेंस नहीं लगाने वाले शिक्षकों के जुलाई माह के वेतन पर खतरा मंडरा रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआइ) के नए निर्देश ने शिक्षा विभाग में हलचल मचा दी है। डीपीआइ ने स्पष्ट किया है कि जुलाई माह का वेतन शिक्षकों और कर्मचारियों की आनलाइन उपस्थिति (वीएसके एप) के आधार पर ही तैयार किया जाएगा। यानी जितने दिनों की आनलाइन उपस्थिति दर्ज होगी, उतने दिनों का ही वेतन जारी किया जाएगा। आदेश सामने आते ही जिले के शिक्षकों में चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ गई हैं।

कमजोर नेटवर्क और अन्य तरह की तकनीकी समस्याओं के चलते आनलाइन हाजिरी लग नहीं पा रही। इस कारण ड्यूटी करने के बाद भी अबसेंट हो जा रहे हैं। इस बीच डीपीआइ ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर कहा है कि जुलाई माह के वेतन भुगतान में आनलाइन उपस्थिति को अनिवार्य आधार बनाया जाए। इसके तहत केवल उन्हीं दिनों का वेतन स्वीकृत होगा, जिन दिनों संबंधित शिक्षक या कर्मचारी की उपस्थिति वीएसके एप में दर्ज मिलेगी। राजनांदगांव जिले में करीब 970 शिक्षकों के वेतन पर संकट नजर आ रहा है। सामने लगातार त्योहार हैं। ऐसे में उनकी परेशानी बढ़ सकती है।


0 आंदोलन की राह अपनाएंगे शिक्षक

इस निर्णय से सबसे अधिक चिंता उन शिक्षकों में देखी जा रही है, जो तकनीकी समस्याओं, नेटवर्क की कमी या अन्य कारणों से नियमित रूप से वीएसके एप में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कर पा रहे हैं। कई शिक्षकों का कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या आम है। ऐसे में प्रतिदिन आनलाइन उपस्थिति दर्ज करना कई बार संभव नहीं हो पाता। यदि ऐसी परिस्थितियों में वेतन में कटौती की जाती है तो यह कर्मचारियों के साथ अन्याय होगा।

 तकनीकी खामियां को दूर करना आवश्यक

शिक्षक संगठनों ने भी इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आनलाइन व्यवस्था को लागू करने से पहले तकनीकी खामियों को दूर करना आवश्यक था। जब तक सभी विद्यालयों में बेहतर इंटरनेट सुविधा और एप का सुचारु संचालन सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक केवल ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर वेतन जारी करना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता। जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें डीपीआइ से प्राप्त निर्देशों का पालन करना है। सभी संकुलों और स्कूलों को आनलाइन उपस्थिति नियमित रूप से दर्ज कराने के लिए पहले भी निर्देश दिए गए थे। अब जुलाई माह के वेतन भुगतान में इसी व्यवस्था का पालन किया जाएगा। इधर, आदेश के बाद कई शिक्षकों ने मांग की है कि जिन मामलों में तकनीकी कारणों से आनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी है, वहां आफलाइन उपस्थिति रजिस्टर को भी मान्य किया जाए। उनका कहना है कि वास्तविक रूप से विद्यालय में उपस्थित रहने के बावजूद यदि वेतन में कटौती होती है, तो इससे कर्मचारियों में असंतोष और बढ़ेगा।


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