राजनांदगांव: वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी माहवारी को लेकर झिझक और चुप्पी बनी हुई है। इसी रूढ़िवादिता को तोड़ने के लिए विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस पर मानपुर विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्रामों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। जन कल्याण सामाजिक संस्थान और प्रोजेक्ट बाला के संयुक्त तत्वावधान में आओ सहेली चुप्पी तोड़ें अभियान के तहत ग्राम बुकमरका, कामखेड़ा, कोराचा और चावरगांव में संवाद व सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कार्यक्रम के दौरान पहली बार माहवारी से गुजर रहीं किशोरी बालिकाओं का सम्मान किया गया। इससे बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ा और माहवारी को लेकर सकारात्मक सोच का संदेश गया। पहाड़ी ग्राम बुकमरका में पहली बार ऐसा माहौल देखने को मिला, जहां माहवारी जैसे संवेदनशील विषय पर महिलाएं, पुरुष और किशोरियां एक साथ खुलकर चर्चा करते नजर आए। संवाद के दौरान ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों ने अपनी समस्याएं भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि गांवों में सेनेटरी पैड उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें पुराने कपड़ों का उपयोग करना पड़ता था। पैड खरीदने के लिए 10 से 12 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता था, जिससे परेशानी और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें बढ़ती थीं।
ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए संस्था की ओर से 120 किशोरी बालिकाओं को रीयूजेबल सेनेटरी पैड मुफ्त वितरित किए गए। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने माहवारी स्वच्छता, संक्रमण से बचाव और रीयूजेबल पैड के सुरक्षित उपयोग की जानकारी दी। वक्ताओं ने कहा कि माहवारी कोई बीमारी या शर्म का विषय नहीं, बल्कि महिलाओं के जीवन की सामान्य प्रक्रिया है। समाज को इसे लेकर अपनी सोच बदलने की जरूरत है। कार्यक्रम में गांवों के पटेल, मितानिन, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। अंत में सभी ने ग्रामीण क्षेत्रों में माहवारी स्वच्छता को लेकर लगातार जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।