रायपुर : अश्वनी नगर सोनकर मैरिज पैलेस में चल रही गीता ज्ञान अमृत वर्षा की कथा में प्रयागराज से पधारे परम पूज्य गुरुदेव श्री संकर्षण शरण जी (गुरुजी) ने कथा में बताए कि गीता रूपी समुद्र में छलांग लगाने पर मनुष्य सब कुछ प्राप्त कर सकता है, संन्यासी संन्यास प्राप्त कर सकता है, योगी योग प्राप्त कर सकता है ,भक्त भक्ति प्राप्त कर सकता है समझने की आवश्यकता है गीता के अनुसार चलने की आवश्यकता है।आगे गुरुजी बताए कि मनुष्य का जीवन कर्म में हीं व्यतीत होता है, जब कुछ नहीं करते हैं तो कर्म न करने का कर्म होता है, ज्ञान और अज्ञान में, भक्ति और नास्तिकता में व्यतीत करता है।कर्म की व्याख्या करते हुए गुरुदेव बताए कि मनुष्य कर्म के बंधन से कभी मुक्त नहीं हो सकते है,भक्ति जरूरी है तब अहंकार नहीं आएगा ज्ञान भक्ति और कर्म से ही जीवन चलता है।गंगा यमुना और सरस्वती । कर्म फल की आकांक्षा से स्वयं को मुक्त करना साथ में भक्ति योग से जुड़ना और ज्ञान का दिखावा न करना जैसे सरस्वती नदी रहती है। आत्म साक्षात्कार के विषय में गुरुजी यह बताएं किव्यक्ति के अंदर ऐसे दो तत्व होते हैं जो आत्म साक्षात्कार नहीं करने देते कर्म फल के बंधन से मुक्त होना। राग और द्वेष आत्म साक्षात्कार के मार्ग में अवरोधक होता है ।यह दो तत्वों से ग्रसित करने वाले लोग कभी आत्म साक्षात्कार नहीं कर पाते है । आज की कथा में गुरुजी यह बताएं कि राग और द्वेष की दिशा मोड़ना, गुरु चरण में जाना, परमात्मा के प्रति करना और द्वेष को समाप्त करना इसको मधु और कैटभ के रूप में व्यक्त किया । जो भगवान के ही पुत्र हैं और भगवान इसको समाप्त किए । जब अपने अंदर आत्मसाक्षात्कार सकते हैं हम संसार के सब चीज को जानते हैं लेकिन स्वयं को ही नहीं जान पाते आत्म साक्षात्कार तभी संभव है जब हम अपने अंदर की बुराई को समाप्त करेंगे । काफी संख्या में लोगों की भीड़ रही कथा के उपरांत निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया जिसमें वासुदेव हॉस्पिटल रोहिणी पुरम तालाब डगरिया से डॉक्टर की टीम के द्वारा निःशुल्क का स्वास्थ्य जांच किया गया।जिसमें आए हुए सभी भक्तगण स्वास्थ्य लाभ लिए यह स्वास्थ्य शिविर पूरे कथा में तीन दिन तक चलेगी।