राजनांदगांव: अपने दशहरा उत्सव को लेकर प्रसिद्ध राष्ट्रीय राजमार्ग पर बसे ग्राम पाटेकोहरा में इस बार उन्नत खेती का संदेश गूंजेगा। लंकापति रावण रथ या किसी वाहन के बजाय हार्वेस्टर मशीन वाहन पर सवार होकर निकलेंगे। इसमें लिखा होगा लंकेश कृषि फार्म। इतना ही नहीं रावण की पूरी सेना 40 ट्रैक्टरों में सवार रहेगी। भगवान राम की सेना हर बार की तरह इस वर्ष भी पैदल ही चलेगी। इस वर्ष का थीम उन्नत खेती से समृद्धि तय किया गया है।
लगभग 71 वर्ष पहले पाटेकोहरा गांव में दशहरा उत्सव की शुरुआत हुई थी। वहां क्वांर माह की दशमी के बदले नवमीं तिथि को यह उत्सव मनाया जाता है। यानी सोमवार को पाटेकोहरा में विजयदशमी पर्व मनाया जाएगा। पहले बैल गाड़ी सवार होकर भगवान राम की सेना शोभायात्रा के रूप में राष्ट्रीय राजमार्ग पर चलकर दशहरा मैदा पहुंचती थी। रावण भैंसा में सवार होकर चलते थे। समय के साथ आयोजन में परिवर्तन किया गया। अब रावण की रैली के नाम से जो शोभायात्रा निकाली जाती है, उसमें 40-45 वाहनों का काफिला होता है। खुली जीप-कार में लंकेश होते हैं। हर वाहन में एक राक्षस होता है। दूसरे छोर से भगवान राम की सेना होती है। इस दौरान राजमार्ग को वन-वे रखा जाता है। मैदान में पहुंचने के बाद प्रतीकात्मक युद्ध के बाद रावण पुतले का दहन किया जाता है।
खेती के सहारे खड़ा कर सकते हैं महल
आयोजकों ने इस बार का थीम उन्नत खेती से समृद्धि रखा है। भगवान राम की भूमिका निभानेे वाले राजकुमार सिन्हा ने बताया कि रावण की रैली में सारे वाहन कृषि कार्यों से संबद्ध वाले ही होंगे। हार्वेस्टर में रावण सवार रहेगा। इसमें उन्नत कृषि से समृद्धि को प्रदर्शित करते कई प्रेरणादायक संदेश लिखे होंगे। ट्रैक्टर व अन्य कृषि वाहनों में उनकी सेना होगी। इसके पीछे मंशा यह है कि ग्रामीण-किसान उन्नत खेती के माध्यम से अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। इससे वे सोने का महल यानी सर्वसुविधायुक्त घर बना सकते हैं। अपना जीवन बेहतर कर सकते हैं। सिन्हा के अनुसार आयोजन के माध्यम से किसानों की संपन्नता का प्रेरणात्मक संदेश दिया जाएगा।
तीन पीढ़ी से चल रही परंपरा, हर घर मेहमान
तीन पीढ़ी से चल रहे पारंपरिक दशहरा उत्सव के पहले गांव में स्थापित मां दुर्गा पंडाल के पास रामलीला का मंचन भी होता था। यह पांच दिनों तक चलता था। आखिरी दिन हवन-पूजा और ज्योत विसर्जन के बाद सिर्फ दशहरा ही मनाया जाता है। उत्सव में शामिल होने आसपास के गांवों से लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। हर घर में मेहमान आते हैं। उस दिन गांव में पूरे दिन मेले की तरह वातावरण होता है। दीपावली की रात रामलीला के मंचन की परंपरा निर्बाध जारी है। इसके लिए गांव के राजकुमार सिन्हा भगवान राम और परमजीत सिंह पम्मा रावण की भूमिका निभाते हैं। हर पात्र के लिए युवाओं में होड़ रहती है।