इजरायली सेना ने गुरुवार को बताया कि ईरान ने कम से कम एक ऐसी मिसाइल दागी, जिसमें छोटे-छोटे बम (क्लस्टर मिसाइल) थे, जिनका मकसद नागरिकों को ज्यादा नुकसान पहुंचाना था। यह इस जंग में क्लस्टर मिसाइल के पहले इस्तेमाल का दावा है।
नागरिक इलाकों में फटे बम
न्यूज़ एजेंसी ISNA के मुताबिक, ये इलाके ईरान के परमाणु कार्यक्रम का अहम हिस्सा हैं। दूसरी तरफ, लेबनान की हिजबुल्लाह ने ईरान का खुलकर समर्थन किया है।
संयुक्त राष्ट्र में आपात बैठक
वॉशिंगटन के एक ईरानी मानवाधिकार समूह के मुताबिक, ईरान में अब तक 639 लोग मारे गए हैं, जिनमें 263 आम नागरिक हैं, जबकि 1,300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजरायल पर करीब 400 मिसाइलें और सैकड़ों ड्रोन दागे, जिससे इजरायल में 24 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की मिसाइलें इजरायल में एक मेडिकल बिल्डिंग और आसपास के अपार्टमेंट्स पर गिरीं, जिससे भारी नुकसान हुआ।
ईरान के IRGC कमांडर मोहसिन रजेई ने कहा कि नतांज, इस्फहान, खंदाब और अराक जैसे परमाणु ठिकानों की सामग्री को हमलों से पहले सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिया गया था। उन्होंने चेतावनी दी, "युद्धविराम दुश्मन को ताकत जुटाने का मौका देगा, जो कबूल नहीं।"
रजेई ने कहा कि ईरान ने अब तक अपनी सिर्फ 30% सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया है और युद्ध को धीरे-धीरे तेज किया जा रहा है।इजरायल पर फिर ईरान ने दागी मिसाइलें
द न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान ने अभी परमाणु बम बनाने का फैसला नहीं किया, लेकिन उसके पास पर्याप्त समृद्ध यूरेनियम का भंडार है। यह जंग अब और गहराने की ओर बढ़ रही है, जिसमें दोनों मुल्कों के साथ-साथ वैश्विक ताकतों की भूमिका भी अहम हो गई है।