May 31, 2026


कब रखा जाएगा अधिक मास की कालाष्टमी का व्रत? यहां से नोट कर लें सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

सनातन धर्म में कालाष्टमी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है, जिसमें भगवान शिव के रुद्रावतार की उपासना की जाती है। वहीं, पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु की उपासना के लिए शुभ माना गया है। ऐसे में इस पावन माह में पड़ने वाली कालाष्टमी तिथि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में कालभैरव की पूजा-अर्चना का 3 गुना अधिक लाभ मिलता है। तो चलिए जानते हैं जून में अधिक कालाष्टमी का व्रत किस दिन रखा जाएगा। इसके साथ ही पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व भी जानेंगे। 

अधिक कालाष्टमी व्रत 2026 कब है?

अधिक मास की अष्टमी तिथि की शुरुआत 8 जून, सोमवार को सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर होने जा रही है। इसका समापन 9 जून, मंगलवार को सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर होगा। ऐसे में कालाष्टमी का व्रत 8 जून को रखा जाएगा। 

कालाष्टमी व्रत 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी व्रत की पूजा प्रदोष काल में करने का महत्व बताया गया है। पंचांग के अनुसार, 8 जून को प्रदोष काल की शुरुआत 6 बजकर 30 मिनट पर होगी, जो शाम 7 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। यह एक घंटे की अवधि कालाष्टमी पूजा-अर्चना के लिए श्रेष्ठ बताया गया है।  

ऐसे करें कालाष्टमी की पूजा

कालाष्टमी के दिन प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लें।

इस दिन रात्रि में विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करने का महत्व है।

पूजा स्थान पर भगवान की मूर्ति या चित्र स्थापित कर पुष्प चढ़ाएं और तिलक करें। 

इसके बाद सरसों का तेल, काले तिल, नारियल, लड्डू और मीठा पान काल भैरव को अर्पित करें।

काल भैरव को शराब, इमरती और जलेबी, काले चने, दही-बड़ा, हलवा और खीर, गुलगुले और मदिरा का भोग लगाएं। 

सरसों के तेल का दीपक जलाकर भैरव चालीसा का पाठ और मंत्रों का जाप करें।

कुत्ते को कराएं भोजन

कालाष्टमी के दिन कुत्तों को भोजन कराना एक महत्वपूर्ण परंपरा है। कहा जाता है कि कुत्ता भगवान काल भैरव का वाहन होता है। काल भैरव की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक उनके वाहन श्वान को भोजन न कराया जाए। उसे भोजन कराने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। 


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