राजनांदगांव: कृषि ऋण वितरण प्रक्रिया को लेकर सहकारिता विभाग ने बड़ा निर्णय लेते हुए संयुक्त खाताधारक किसानों के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। अब संयुक्त जमीन पर खेती करने वाले किसानों को केसीसी के तहत नकद और वस्तु ऋण तभी मिलेगा, जब खाते से जुड़े सभी हिस्सेदार अपनी लिखित सहमति देंगे। बिना सभी सदस्यों के हस्ताक्षर के ऋण जारी नहीं किया जाएगा। कार्यालय उपायुक्त, सहकारिता एवं उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं द्वारा जारी आदेश के बाद सहकारी समितियों और बैंकों को भी स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि संयुक्त खातों में पारदर्शिता की कमी और बिना जानकारी ऋण निकाले जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं, जिसके कारण यह सख्त कदम उठाया गया है। अब तक कई मामलों में ऐसा देखा गया कि संयुक्त जमीन में दर्ज किसी एक सदस्य ने अन्य हिस्सेदारों की जानकारी या सहमति के बिना केसीसी ऋण निकाल लिया। बाद में ऋण वसूली और जमीन को लेकर परिवारों के बीच विवाद की स्थिति बन जाती थी। ऐसे मामलों ने सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए थे।
वित्तीय अनियमितताओं और आपसी विवाद
नए आदेश के तहत संयुक्त खाते में अलग-अलग खेती करने वाले कृषकों को उनकी मांग के अनुसार अलग-अलग ऋण देने की प्रक्रिया भी समाप्त कर दी गई है। विभाग ने साफ कर दिया है कि संयुक्त खाते की स्थिति में ऋण केवल खाते के प्रमुख सदस्य के माध्यम से ही जारी होगा और इसके लिए सभी हिस्सेदारों के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। केसीसी वितरण की प्रक्रिया अप्रैल माह से शुरू हो चुकी है और वर्तमान में चल रहे सुशासन तिहार के दौरान भी बड़ी संख्या में किसानों को ऋण वितरित किया जा रहा है। इसी दौरान यह शिकायतें सामने आई थीं कि कुछ किसानों को अन्य हिस्सेदारों की जानकारी के बिना ऋण दे दिया गया। इससे वित्तीय अनियमितताओं और आपसी विवादों की स्थिति बनने लगी थी।
ऋण मामलों में आएगी पारदर्शिता
सहकारिता विभाग का मानना है कि नए नियम लागू होने से संयुक्त जमीन से जुड़े ऋण मामलों में पारदर्शिता आएगी और किसानों के बीच विवाद कम होंगे। हालांकि दूसरी ओर कई किसानों का कहना है कि अब ऋण प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक जटिल हो जाएगी, क्योंकि सभी परिवारजनों की सहमति और उपस्थिति सुनिश्चित करना आसान नहीं होगा। फिलहाल विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना सभी हिस्सेदारों की अनुमति के किसी भी संयुक्त खाते पर कृषि ऋण स्वीकृत नहीं किया जाएगा। इससे सहकारी समितियों और बैंकों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।