25 अक्टूबर :- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, राजनांदगांव नगर* द्वारा 25 अक्टूबर को म्युनिसिपल स्कूल मैदान में शस्त्र पूजन एवं विजयादशमी उत्सव श्रद्धा, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ व्यवसायी श्री सुनील अग्रवाल जी तथा मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रांत प्रचारक श्री नारायण नामदेव जी का सानिध्य एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के अंतर्गत नगर में तीन प्रमुख स्थानों—उदयाचल प्रांगण, मेजर ध्यानचंद चौक तथा स्टेट स्कूल लाइब्रेरी मैदान—से स्वयंसेवकों का पथसंचलन एक ही समय पर प्रारंभ हुआ। नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए तीनों संचलनों का मानव मंदिर चौक पर संगम हुआ। इसके पश्चात सभी स्वयंसेवक एक साथ गुरुद्वारा मार्ग से होते हुए म्युनिसिपल स्कूल मैदान पहुंचे। अनुशासित पथसंचलन ने संगठनात्मक एकता, सामूहिकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
कार्यक्रम का प्रारंभ संघ गीत, सुभाषित एवं अमृत वचन के साथ हुआ। इसके पश्चात मुख्य अतिथि श्री सुनील अग्रवाल जी ने अपने आशीर्वचन प्रदान किए। तत्पश्चात मुख्य वक्ता श्री नारायण नामदेव जी ने अपने उद्बोधन में भारतीय संस्कृति, राष्ट्र गौरव और व्यक्ति निर्माण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
श्री नामदेव जी ने कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म ऐसी पावन मातृभूमि में हुआ है, जहां संतों, तपस्वियों और महापुरुषों ने अपने जीवन एवं आदर्शों से समाज को दिशा प्रदान की है। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह जी और स्वामी विवेकानंद जी जैसे महापुरुषों का स्मरण करते हुए उनके जीवन से राष्ट्रभक्ति, साहस, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
उन्होंने संघ की शाखा में गाए जाने वाले गीत “चंदन है इस देश की माटी, तपोभूमि हर ग्राम है; हर बाला देवी की प्रतिमा, बच्चा-बच्चा राम है” का उल्लेख करते हुए कहा कि शाखा में गीत, अमृत वचन, शारीरिक व्यायाम और सामूहिक गतिविधियों के माध्यम से व्यक्ति निर्माण का कार्य किया जाता है। शाखा स्वयंसेवकों में अनुशासन, आत्मविश्वास, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित करने का माध्यम है।
अपने संबोधन में उन्होंने आपातकाल के दौरान मीसा के अंतर्गत बंदी बनाए गए स्वयंसेवकों तथा दिल्ली में हुए सत्याग्रह आंदोलन का उल्लेख करते हुए उस दौर के संघर्षों और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने महात्मा गांधी जी के संघ शिविर में आगमन तथा डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी और महात्मा गांधी जी के बीच हुई वार्ता का संक्षिप्त उल्लेख किया।
उद्बोधन के अंतिम चरण में श्री नामदेव जी ने समाज जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए संघ द्वारा प्रतिपादित पांच परिवर्तन—सामाजिक समरसता, स्वदेशी, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण तथा नागरिक कर्तव्य— को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने स्वयंसेवकों सहित समाज के प्रत्येक नागरिक से इन विषयों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने तथा पूर्ण निष्ठा के साथ अपने सामाजिक एवं राष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन करने का आग्रह किया।
विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने राष्ट्रभक्ति, सामाजिक एकता, अनुशासन और सेवा के मूल्यों को आत्मसात करने का संदेश दिया। संघ के 101वें वर्ष के संदर्भ में आयोजित यह उत्सव समाज के प्रति समर्पण, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को सुदृढ़ करने का अवसर बना।