June 11, 2026


इलाज की रफ्तार बढ़ाएगी थ्री टेस्ला एमआरआइ

मार्च 2025 में हुई थी घोषणा, अब अंतिम चरण में पहुंची टेंडर प्रक्रिया

राजनांदगांव: भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध अस्पताल में अत्याधुनिक थ्री टेस्ला एमआरआइ मशीन लगाने की दिशा में लंबी प्रतीक्षा के बाद बड़ी प्रगति हुई है। मार्च 2025 में करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से मशीन स्थापित करने की घोषणा हुई थी, लेकिन टेंडर प्रक्रिया और तकनीकी शर्तों के निर्धारण में समय लगने से काम आगे नहीं बढ़ पाया। अब टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है और अस्पताल प्रबंधन को उम्मीद है कि आने वाले एक दो माह में मशीन अस्पताल पहुंच जाएगी।

525 बिस्तरों वाले मेडिकल कालेज अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने के बाद मरीजों को जांच के लिए निजी केंद्रों का रुख नहीं करना पड़ेगा। गंभीर चोट, ब्रेन स्ट्रोक, कैंसर, रीढ़ और नसों से जुड़ी बीमारियों की जांच अब जिले में ही अत्याधुनिक तकनीक से हो सकेगी।

जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) ने थ्री टेस्ला एमआरआइ मशीन, टर्नकी कार्य और आवश्यक मानव संसाधन सहित टेंडर जारी किया है। निविदा की अनुमानित लागत 25 करोड़ रुपये रखी गई है तथा मशीन की आपूर्ति मेडिकल कालेज अस्पताल पेंड्री में की जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार केवल मशीन खरीदना ही उद्देश्य नहीं था। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए ऐसी तकनीक का चयन किया गया है जो लंबे समय तक उपयोगी रहे। मशीन के संचालन, रखरखाव, भवन संबंधी आवश्यकताओं और तकनीकी मानकों को ध्यान में रखकर विस्तृत शर्तें तैयार की गईं। इसी वजह से निविदा प्रक्रिया अपेक्षाकृत लंबी चली।

अस्पताल में वर्तमान में एमआरआइ सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों को निजी जांच केंद्रों में जाना पड़ता है। इससे जांच में देरी के साथ अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। मशीन शुरू होने के बाद गंभीर मरीजों का उपचार और निदान दोनों तेज होंगे।

 निजी सेंटरों में छह हजार से शुरु होती है जांच

निजी जांच केंद्रों में एमआरआइ जांच की सुविधा काफी महंगी है। इस जांच की दर छह हजार रुपये से शुरु होती है। मध्यमवर्गीय और गरीब तबके के लोगों के लिए ये जांच कहीं भी सस्ती दरों पर मौजूद नहीं है। चिकित्सकों के अनुसार ट्रामा मामलों के अलावा वर्तमान जीवनशैली के चलते भी नसों की दिक्कतें बढ़ रही है। इसके लिए एमआरआइ की जांच जरुरी हो जाती है।

 दुर्घटना और स्ट्रोक के मरीजों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

सड़क दुर्घटना, सिर में गंभीर चोट, ब्रेन हैमरेज, लकवा, रीढ़ की चोट और नसों से जुड़ी बीमारियों के मामलों में एमआरआइ सबसे महत्वपूर्ण जांच मानी जाती है। मेडिकल कालेज में सुविधा उपलब्ध होने से ट्रामा सेंटर में भर्ती मरीजों की जांच तत्काल हो सकेगी। इससे उपचार शुरू करने में लगने वाला समय कम होगा और जटिल मामलों में बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।

 मई में निकली निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में

एमसीएच में एमआरआइ मशीन के लिए सात मई को आनलाइन टेंडर जारी किया गया। निविदाकारों को 20 मई तक का समय दिया गया था। इसके बाद निविदाकारों के दस्तावेजों के सत्यापन और अन्य प्रक्रिया जारी है। सप्लायर ही शुरुआती वर्षों में इसके संचालन के लिए तकनीशियन भी उपलब्ध कराएंगे। एमसीएच में नवंबर 2025 से सीटी स्कैन की जांच भी शुरु की गई है। इसके लिए भी तकनीशियन सप्लायर की ओर से ही उपलब्ध करवाए गए हैं।

 रुम तैयार, कनेक्शन के लिए टेंडर की प्रक्रिया

सीटी स्कैन के इंस्टालेशन के दौरान स्कैन रुम और मशीन के लिए बिजली कनेक्शन की समस्या से दो चार हो चुके मेडिकल कालेज प्रबंधन ने पहले से ही इसके लिए तैयारी कर रखी है। एमआरआइ मशीन के लिए विशेष कक्ष पहले ही तैयार है। वहीं पीडब्लूडी ई एंड एम द्वारा यहां केबल कनेक्शन के कार्य के लिए निविदा बुलाई गई है। मशीन के आने से पहले ही सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रही हैं।


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