राजनांदगांव: टीबी (क्षय रोग) से जूझ रहे मरीजों को इलाज के दौरान पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित पोषण सहायता योजना की राशि पिछले चार माह से अटकी हुई है। जिले में 500 से अधिक मरीजों को आर्थिक सहायता का इंतजार है। योजना के तहत प्रत्येक पात्र मरीज को प्रतिमाह एक हजार रुपये दिए जाते हैं, लेकिन बीते चार माह से राशि नहीं मिलने के कारण मरीजों के सामने पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने की चुनौती खड़ी हो गई है। 500 से अधिक मरीजों की चारों माह की राशि लंबित होने पर बकाया रकम 20 लाख रुपये से अधिक हो जाती है। टीबी के उपचार में नियमित दवाइयों के साथ पौष्टिक भोजन भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में पोषण सहायता समय पर नहीं मिलने से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। इस राशि का उपयोग मरीज भोजन और पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में करते हैं। मरीजों को चार माह की राशि के रूप में प्रति व्यक्ति चार हजार रुपये मिलने हैं। इससे पहले भी कुछ माह मरीजों को दवाइयां नहीं मिल पाने की समस्या सामने आइ थी।
डेढ़ साल पहले 500 से बढ़ाकर एक हजार हुई राशि
टीबी मरीजों को पहले पोषण आहार के लिए प्रतिमाह 500 रुपये दिए जाते थे। करीब डेढ़ साल पहले सहायता राशि बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दी गई। यह राशि सीधे मरीज के बैंक खाते में जमा की जाती है। योजना का उद्देश्य उपचार अवधि के दौरान मरीजों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराना और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने में मदद करना है। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मरीजों को छह माह तक प्रतिमाह एक हजार रुपये देने का प्रविधान है। हालांकि, वर्तमान में चार माह की राशि लंबित होने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
जांच अभियान में मिले थे करीब 500 मरीज
स्वास्थ्य विभाग ने जिले में अभियान चलाकर संभावित टीबी मरीजों की जांच की थी। इस दौरान करीब 1200 संभावित मरीज सामने आए थे, जिनकी अंतिम जांच के बाद लगभग 500 मरीजों की पहचान हुई थी। विभाग की ओर से टीबी मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने वाले व्यक्ति को प्रोत्साहन स्वरूप 500 रुपये देने का प्रविधान भी है। वहीं छह माह तक मरीज को दवा उपलब्ध कराने में सहयोग करने वाले ट्रीटमेंट सपोर्टर को एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है।