October 19, 2026


दहेज मृत्यु भोज और डीजे के शोर पर रोक नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

सामाजिक नियमावली की दी जानकारी, बच्चों में बचपन से संस्कार डालने और फिजूलखर्ची रोकने पर जोर

राजनांदगांव: दहेज प्रथा पर रोक, मृत्यु भोज में मिष्ठान और कलेवा नहीं परोसने तथा विवाह समारोहों में डीजे के तेज शोर पर नियंत्रण। सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए साहू समाज ने नियमों के पालन पर जोर दिया है। छुरिया क्षेत्र के ग्राम कल्लूबंजारी में आयोजित परीक्षेत्रीय साहू संघ के परिवार संस्कार कार्यक्रम में प्रदेश साहू संघ की ओर से जारी सामाजिक नियमावली के प्रमुख बिंदुओं को पढ़कर सुनाया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सामाजिक अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

वक्ताओं ने कहा कि बेटी के विवाह में दहेज देने की परंपरा समाप्त करने के लिए समाज को आगे आना होगा। इसकी शुरुआत परिवार से होनी चाहिए। माता-पिता बेटों में ऐसे संस्कार विकसित करें कि वे विवाह के समय दहेज की मांग न करें। विवाह समारोहों में तेज आवाज वाले डीजे से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता भी बताई गई। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक आयोजनों में दिखावे और अनावश्यक खर्च के बजाय सादगी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उक्त कार्यक्रम में जिला साहू संघ के अध्यक्ष नोबेल साहू मुख्य अतिथि थे। अध्यक्षता तहसील साहू संघ के अध्यक्ष चुरामन साहू ने की। विशेष अतिथि के रूप में तहसील साहू संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान संरक्षक भुनेश्वर साहू, राजनांदगांव नगर साहू समाज के अध्यक्ष रोशन साहू, भुनेश्वरी साहू, जिला सह संयोजिका लीला साहू, ठगिया साहू, योगराज साहू, कुमेश्वरी साहू, कविता साहू, जाकेश साहू, प्रेमी साहू, टहलू राम साहू, बीरेन्द्र साहू, दिलीप साहू, खीर्मेंद्र साहू, गजेंद्र साहू और बालकिशन साहू सहित समाज के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

 मृत्यु भोज में मिष्ठान और कलेवा पर रोक

कार्यक्रम में प्रदेश साहू संघ की ओर से जारी 20 से 25 बिंदुओं वाली सामाजिक नियमावली की जानकारी दी गई। इसमें मृत्यु भोज के दौरान मिष्ठान अथवा कलेवा नहीं खिलाने सहित विभिन्न सामाजिक नियमों का उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन नियमों का उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों को दूर करना और अनावश्यक आर्थिक बोझ कम करना है। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रविधान भी बताया गया।

सुधार की शुरुआत परिवार से

वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक सुधार केवल नियम बनाने से नहीं, बल्कि उनके पालन से संभव है। माता-पिता बच्चों को बचपन से बड़ों का सम्मान, छोटों से स्नेह और भारतीय संस्कृति व परंपराओं के प्रति जिम्मेदारी का भाव सिखाएं। पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण से बचते हुए समाज को अपनी अच्छी परंपराओं का संरक्षण करना चाहिए। कार्यक्रम में परीक्षेत्रीय साहू संघ के अध्यक्ष हुकुम सिंह साहू, उपाध्यक्ष चित्ररेखा साहू, चंद्रशेखर साहू, जीतू राम, संगठन सचिव शैलेन्द्री साहू, कोषाध्यक्ष पवन कुमार, सचिव महेंद्र साहू सहित समाज के अनेक पदाधिकारी, सदस्य और महिलाएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की जानकारी हुकुम सिंह साहू ने दी।



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