धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन सच्चे मन से संध्याकाल में भगवान शिव और मां पार्वती की साधना करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है और जीवन के सभी भय से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
इस व्रत को हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर किया जाता है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कब किया जाएगा अप्रैल माह का आखिरी प्रदोष व्रत।
वैदिक पंचांग के अनुसार, 28 अप्रैल को प्रदोष व्रत किया जाएगा। इस दिन मंगलवार है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत- 28 अप्रैल को शाम को 06 बजकर 51 मिनट पर
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का समापन- 29 अप्रैल को रात 07 बजकर 51 मिनट पर
पूजा का समय- शाम को 06 बजकर 54 मिनट से 09 बजकर 04 मिनट तक
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 17 मिनट से 05 बजे तक
विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 31 मिनट से 03 बजकर 23 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 53 मिनट से 03 बजकर 23 मिनट तक
निशिता मुहूर्त - रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 40 मिनट तक (29 अप्रैल)
सूर्योदय का समय: प्रातः 05 बजकर 53 मिनट तक
सूर्यास्त का समय: सायं 06 बजकर 54 मिनट तक
चंद्रोदय का समय: प्रातः 04 बजकर 04 मिनट तक
चंद्रास्त का समय: प्रातः 04 बजे