June 10, 2026


: साइबर ठगी में प्रयुक्त म्यूल अकाउंट धारक गिरफ्तार

थाना सिटी कोतवाली राजनांदगांव पुलिस की बड़ी कार्यवाही आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया जेल। विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी की राशि प्राप्त करने के उद्देश्य से किया गया था अवैध कृत्य। गिरफ्तार आरोपी : रूपेन्द्र कुमार वर्मा पिता मोहन लाल वर्मा, उम्र 25 वर्ष, निवासी ग्राम पलान्दुर, ओ.पी. मोहारा, थाना डोंगरगढ़, जिला राजनांदगांव (छ.ग.)।

राजनांदगांव :-  वर्तमान समय में बढ़ते साइबर अपराधों में म्यूल बैंक खातों के उपयोग को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव सुश्री अंकिता शर्मा (भा.पु.से.) के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री कीर्तन राठौर (रा.पु.से.) एवं नगर पुलिस अधीक्षक श्री अलेक्जेंडर किरों (रा.पु.से.) के मार्गदर्शन तथा थाना प्रभारी सिटी कोतवाली निरीक्षक उपेन्द्र कुमार शाह  द्वारा टीम गठित कर आरोपियों की तलाश एवं गिरफ्तारी हेतु विशेष अभियान चलाया गया।

प्रकरण का विवरण

भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के "समन्वय पोर्टल" से प्राप्त जानकारी के आधार पर ऐसे म्यूल बैंक खातों की पहचान की गई, जिनका उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के लेन-देन, व्ययन एवं संवर्धन के लिए किया जा रहा था।

जांच के दौरान यह पाया गया कि संबंधित बैंक खातों का उपयोग साइबर धोखाधड़ी से अर्जित अवैध धनराशि को प्राप्त करने एवं आगे हस्तांतरित करने के लिए किया गया। बैंक खाताधारकों एवं सहयोगियों द्वारा यह जानते हुए भी कि उक्त राशि धोखाधड़ी एवं बेईमानी से प्राप्त की गई है, उसे प्राप्त एवं उपयोग किया जा रहा था।

उक्त तथ्यों के आधार पर थाना सिटी कोतवाली राजनांदगांव में अपराध क्रमांक 279/2025 धारा 317(2), 317(4), 317(5), 111 एवं 3(5) भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

विवेचना के दौरान पूर्व में एक आरोपी चुम्मन कुमार वर्मा को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा जा चुका है। प्रकरण में संलिप्त दूसरे आरोपी रूपेन्द्र कुमार वर्मा को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसने अपराध स्वीकार किया। तत्पश्चात दिनांक 09.06.2026 को विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

सराहनीय भूमिका

उक्त कार्यवाही में थाना प्रभारी निरीक्षक उपेन्द्र कुमार शाह, उप निरीक्षक राधेश्याम जूरी, आरक्षक प्रकाश कुर्रे, शंकर सिंह मरकाम एवं थाना स्टाफ की सराहनीय भूमिका रही।

क्या है "म्यूल अकाउंट" ?

"म्यूल अकाउंट" ऐसा बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी अवैध रूप से प्राप्त धनराशि को छिपाने, स्थानांतरित करने अथवा निकालने के लिए करते हैं।

म्यूल अकाउंट कैसे काम करता है?

अपराधी किसी व्यक्ति को लालच देकर या धोखे से उसका बैंक खाता उपयोग करने की अनुमति प्राप्त करते हैं।

साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि उस खाते में जमा की जाती है।

इसके बाद राशि को कई अन्य खातों में ट्रांसफर किया जाता है ताकि जांच एजेंसियों के लिए धन का स्रोत पता लगाना कठिन हो जाए।

म्यूल अकाउंट धारक कौन हो सकते हैं?

ऐसे व्यक्ति जिन्हें यह जानकारी नहीं होती कि उनके खाते का गलत उपयोग किया जा रहा है।

आर्थिक रूप से कमजोर लोग जिन्हें कमीशन या लालच देकर फंसाया जाता है।

ऐसे व्यक्ति जो जानबूझकर अपराधियों की सहायता करते हैं।

इससे बचने के उपाय

किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या मोबाइल सिम न दें।

किसी भी प्रकार के कमीशन या बड़ी रकम के लालच में न आएं।

अपने बैंक खाते के लेन-देन की नियमित जांच करें।

किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस या साइबर सेल को दें।

राजनांदगांव पुलिस की अपील

राजनांदगांव पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि किसी के कहने पर अपना बैंक खाता, मोबाइल सिम, चेकबुक अथवा एटीएम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें। साइबर अपराधी ऐसे खातों का उपयोग गेमिंग एप, गैंबलिंग एप, फर्जी ट्रेडिंग एप, सेक्सटॉर्शन, डिजिटल अरेस्ट एवं अन्य प्रकार की साइबर ठगी में करते हैं।

खाता किराये पर देना, कमीशन पर उपलब्ध कराना अथवा बेचना कानूनन अपराध है। ऐसे खातों को "म्यूल अकाउंट" कहा जाता है। इन खातों के माध्यम से साइबर अपराध में सहयोग करने वाले खाताधारकों तथा ऐसे खातों की व्यवस्था करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भी विधिसम्मत कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

जनहित में जारी – राजनांदगांव पुलिस


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