June 27, 2026


स्वस्थ जीवनशैली और समय पर सीपीआर से बचाई जा सकती हैं अनमोल जिंदगियां

अटल स्मृति मेडिकल कॉलेज की पहल, 200 विद्यार्थियों को स्वास्थ्य जागरूकता और सीपीआर का प्रशिक्षण*

राजनांदगांव :- स्वस्थ समाज के निर्माण और आपातकालीन परिस्थितियों में आमजन को जीवनरक्षक तकनीकों से प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, राजनांदगांव द्वारा गुरुवार को पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय (पीटीएस) के सभागार में सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता एवं मूलभूत जीवनरक्षक सहायता प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य जागरूकता, स्वस्थ जीवनशैली और मूलभूत जीवनरक्षक सहायता (बीएलएस) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी। कार्यक्रम में पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय के लगभग 200 विद्यार्थियों एवं शिक्षकगण ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संयुक्त संचालक सह चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अतुल मनोहरराव देशकर ने जीवनशैली में परिवर्तन का महत्व, नींद एवं योग की भूमिका विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि वर्तमान समय में अनियमित दिनचर्या, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता अनेक गंभीर बीमारियों का कारण बन रही है। उन्होंने बताया कि पर्याप्त एवं गुणवत्तापूर्ण नींद, संतुलित आहार, नियमित योगाभ्यास और सकारात्मक जीवनशैली अपनाकर अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से नशामुक्त एवं अनुशासित जीवन अपनाने का भी आह्वान किया। इसके पश्चात चिकित्सा विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रकाश खुंटे ने "मूलभूत जीवनरक्षक सहायता (बीएलएस) प्रशिक्षण" विषय पर व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया। उन्होंने बताया कि हृदयाघात, दुर्घटना या अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि सही समय पर सही तकनीक से हृदय-फेफड़ा पुनर्जीवन (सीपीआर) और प्राथमिक उपचार दिया जाए तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने प्रतिभागियों को हृदय-फेफड़ा पुनर्जीवन (सीपीआर) देने की सही प्रक्रिया, सांस रुकने की स्थिति में प्राथमिक सहायता, बेहोश व्यक्ति की देखभाल तथा आपातकालीन परिस्थितियों में घबराने के बजाय त्वरित एवं वैज्ञानिक तरीके से प्रतिक्रिया देने का प्रशिक्षण दिया। विद्यार्थियों ने इस प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी करते हुए विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास भी किया।कार्यक्रम में पुलिस विभाग की प्रशिक्षण टीम की विशेष भूमिका रही। टीम के सदस्यों ने आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय, प्राथमिक उपचार, हृदय-फेफड़ा पुनर्जीवन (सीपीआर) तथा अन्य जीवनरक्षक तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन कर प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया। इस अवसर पर डीएसपी श्री बी.एस. भदौरिया, उपनिरीक्षक श्री जाकिर अली, प्रधान आरक्षक श्री कौशल प्रसाद पटेल, आरक्षक श्री रंजीत द्विवेदी, सहायक उपनिरीक्षक श्री इन्द्रावन यादव, परिचारिका श्रीमती शोभा गाभिये सहित पुलिस प्रशिक्षण टीम के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। टीम ने प्रशिक्षण को अत्यंत रोचक एवं व्यावहारिक बनाते हुए विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली जीवनरक्षक तकनीकों का अभ्यास कराया।कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. अजय कुमार, डॉ. आदान भाटिया एवं अनिमेष श्रीवास्तव का विशेष सहयोग रहा। पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय, राजनांदगांव के शिक्षकगण तथा लगभग 200 विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी एवं सफल बनाया। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने इस प्रकार के स्वास्थ्य जागरूकता एवं जीवनरक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में प्रत्येक नागरिक को मूलभूत जीवनरक्षक सहायता (बीएलएस) और हृदय-फेफड़ा पुनर्जीवन (सीपीआर) जैसी तकनीकों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी कार्यक्रमों का नियमित आयोजन किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति प्राथमिक उपचार एवं हृदय-फेफड़ा पुनर्जीवन (सीपीआर) जैसी मूलभूत जीवनरक्षक तकनीकों से परिचित हो जाए तो आपातकालीन परिस्थितियों में अनेक अनमोल जिंदगियों को समय रहते बचाया जा सकता है। यही संदेश इस कार्यक्रम के माध्यम से आमजन तक प्रभावी रूप से पहुंचाया गया।


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