राजनांदगांव: गैंदाटोला-नून्हाटोला मार्ग स्थित शराब भट्ठी को हटाने की मांग को लेकर चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन आखिरकार प्रशासनिक आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। करीब एक सप्ताह से जारी धरना प्रदर्शन के बीच सहायक आबकारी आयुक्त अभिषेक तिवारी स्वयं धरना स्थल पहुंचे और ग्रामीणों को शराब दुकान शीघ्र हटाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद आंदोलनकारियों ने अपना धरना स्थगित कर दिया। गौरतलब है कि शराब भट्ठी को हटाने की मांग लंबे समय से क्षेत्र में उठ रही थी। एक महीने पहले पूर्व विधायक छन्नी चंदू साहू के नेतृत्व में ग्रामीणों ने शराब दुकान के सामने प्रदर्शन किया था। ग्रामीणों का आरोप था कि शराब दुकान के कारण मार्ग से आने-जाने वाली स्कूली छात्राओं और महिलाओं को आए दिन शराबियों की छींटाकशी और अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ता है। इससे क्षेत्र का माहौल लगातार खराब हो रहा था और लोगों में भारी नाराजगी थी। उस समय आबकारी विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि आगामी वित्तीय सत्र यानी एक अप्रैल से शराब दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
आवेदन नहीं आने के कारण पुराने स्थल पर ही संचालित
बताया जाता है कि इसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू की गई, लेकिन गैंदाटोला शराब भट्ठी के संचालन के लिए कोई आवेदन नहीं आने के कारण दुकान पुराने स्थान पर ही संचालित होती रही। शराब दुकान नहीं हटने से नाराज ग्रामीणों ने एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाया। पूर्व विधायक छन्नी चंदू साहू, सर्व आदिवासी समाज और किसान मोर्चा के सुदेश टीकम के नेतृत्व में ग्रामीणों ने शराब भट्ठी के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। आंदोलन को गांव-गांव से समर्थन मिलने लगा और बड़ी संख्या में महिलाएं भी इसमें शामिल हुईं।
धरना के सातवें दिन सहायक आबकारी आयुक्त अभिषेक तिवारी, तहसीलदार आकांक्षा साहू और गैंदाटोला थाना प्रभारी राजेश साहू आंदोलन स्थल पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ चर्चा कर शराब दुकान हटाने पर सहमति जताई। सहायक आबकारी आयुक्त ने आश्वासन दिया कि नए स्थल का चयन होने तक वर्तमान शराब दुकान बंद रखी जाएगी। इसके बाद आबकारी विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर दुकान को सील करने की कार्रवाई भी की। इस दौरान धरना स्थल पर पूर्व विधायक श्रीमती छन्नी चंदू साहू, सुदेश टीकम, सूर्य कुमार खिलारी, प्यारे लाल मंडावी, जयपाल यादव, पीआर पंद्रे, मदन साहू, मोती साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।