राजनांदगांव : अर्णब चक्रवात के असर से दिनभर बनी ठंडक के बाद अब बारिश और तेज हवा की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार को वनांचल में सुबह से बादलों ने आसमान घेर लिया। शहरी इलाके में दोपहर तक साफ आसमान के बाद शाम को बदली छाने लगी। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान ‘अर्णब’ के प्रभाव से राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में 28 और 29 अक्टूबर को भारी से बहुत भारी वर्षा होने की आशंका है। इधर, चक्रवात के संभावित असर को देखते हुए राजनांदगांव जिले के स्कूलों में 28 अक्टूबर को अवकाश घोषित कर दिया गया है।
पूर्वानुमान के अनुसार, इस दौरान हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि झोंकों में यह 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है। मंगलवार को राजनांदगांव कलेक्टर ने बैठक में चक्रवात के अलर्ट से संबंधित कार्रवाईयों का ब्यौरा लिया। उन्होंने आपदा से बचाव के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। सीएसपीडीसीएल ने भी विभागीय तौर पर अलर्ट जारी कर कर्मचारियों को सतर्क रहने कहा है। कृषि विज्ञान केंद्र सुरगी ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
मौसम विभाग ने 27 अक्टूबर को आरेंज अलर्ट घोषित करते हुए तीनों जिलों में अगले 48 घंटे के दौरान बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई है। इससे खेतों में पककर तैयार धान की फसल, कटाई के बाद खुले में रखी उपज और जनजीवन प्रभावित हो सकता है। तीनों जिलों में कुछ स्थानों पर 24 घंटे के दौरान 115.6 से 204.4 मिलीमीटर तक वर्षा हो सकती है। भारी वर्षा से निचले इलाकों में जलभराव, सड़कों पर फिसलन, दृश्यता में कमी और यातायात प्रभावित होने की आशंका है। नालों और निचले पुलों पर पानी बढ़ने से आवागमन बाधित हो सकता है।
धान की फसल पर मंडराया संकट
इस समय खरीफ फसलों की कटाई और उपज को सुरक्षित रखने का काम चल रहा है। ऐसे में तेज बारिश से खेतों में खड़ी पकी धान की फसल गिर सकती है। कटी हुई फसल भीगने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा है। खेतों में जलभराव होने पर कटाई और कृषि कार्यों में देरी हो सकती है। वास्तविक नुकसान का आकलन बारिश के बाद ही किया जा सकेगा।
कृषि विज्ञान केंद्र की किसानों को सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र सुरगी की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डा. गुंजन झा ने किसानों को आगामी दो से चार दिनों तक धान, दलहन और तिलहन फसलों की कटाई स्थगित रखने की सलाह दी है। जिन किसानों ने कटाई शुरू कर दी है, वे उपज को सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखें। खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें। तिवड़ा और अलसी की उतेरा बुवाई मौसम अनुकूल होने तक रोकें। रबी फसलों और सब्जियों की बुवाई खेतों की स्थिति अनुकूल होने पर नवंबर के पहले सप्ताह से करें। तेज हवा से बचाव के लिए लौकी, करेला और अन्य लतावर्गीय सब्जियों को सहारा दें। फलदार पौधों, विशेषकर फूल और फल लगे केले के पौधों को गिरने से बचाने की व्यवस्था करें। पशुओं को सुरक्षित शेड में रखें और वज्रपात के दौरान खुले स्थानों या पेड़ों के नीचे आश्रय न लें।