राजनांदगांव :- जिले में प्राकृतिक आपदा और खराब मौसम के कारण किसानों की फसलों को हुए नुकसान के बीच भाजपा किसान नेता अशोक चौधरी ने राज्य सरकार से किसानों को तत्काल आर्थिक राहत देने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं कृषि मंत्री से आग्रह किया है कि दीपावली जैसे बड़े त्योहार से पहले किसानों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए प्रति एकड़ 5 हजार रुपये की राशि सोसायटियों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए। इस राशि का समायोजन धान खरीदी के बाद किया जा सकता है, ताकि आर्थिक संकट से जूझ रहे किसान भी परिवार के साथ दीपावली का त्योहार खुशियों के साथ मना सकें।
श्री चौधरी ने कहा कि वर्तमान में बड़ी संख्या में किसानों की फसल खराब हो चुकी है। धान खरीदी शुरू होने में भी अब लगभग 15 दिन शेष हैं। ऐसे समय में किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। एक ओर फसल नुकसान के कारण उनकी आमदनी प्रभावित हुई है, वहीं दूसरी ओर खेती-किसानी में लगाई गई पूंजी की भरपाई करना भी मुश्किल हो रहा है। दीपावली नजदीक है और किसानों को परिवार की जरूरतों, त्योहार की तैयारी तथा अन्य खर्चों के लिए पैसों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की किसान हितैषी सरकार से किसानों को यह अपेक्षा है कि वह संकट की इस घड़ी में उनके साथ खड़ी होगी। प्रति एकड़ 5 हजार रुपये की अंतरिम सहायता सोसायटियों के माध्यम से देने से किसानों को तत्काल राहत मिलेगी। धान खरीदी के बाद इस राशि का समायोजन करने का विकल्प भी सरकार के पास है। इससे किसानों को कर्ज या अन्य स्रोतों से पैसे जुटाने की मजबूरी नहीं होगी और वे दीपावली का पर्व सम्मानपूर्वक मना सकेंगे। श्री चौधरी ने धारा 6/4 के तहत मिलने वाली मुआवजा राशि को भी अपर्याप्त बताते हुए इसमें उदारता बरतने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान मुआवजा व्यवस्था के तहत किसानों को मिलने वाली राशि फसल नुकसान और खेती की वास्तविक लागत की तुलना में बहुत कम है। एक एकड़ में खेती करने के लिए किसान को बीज, खाद, दवाइयों, मजदूरी, सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों पर लगभग 22 से 25 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। वहीं दूसरी ओर फसल खराब होने पर मिलने वाली राहत राशि इस लागत की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किए जाने पर किसान को लगभग 65 हजार रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हो सकती है। ऐसे में जब किसान की पूरी मेहनत और लागत प्राकृतिक आपदा के कारण प्रभावित हो गई है, तब उसे मिलने वाली बेहद कम मुआवजा राशि उसके नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि मुआवजा लगभग 13 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर यानी करीब 4300 रुपये प्रति एकड़ तक सीमित रहता है, तो यह किसान की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप राहत नहीं है। श्री चौधरी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं कृषि मंत्री से विशेष आग्रह किया है कि धारा 6/4 के तहत मुआवजा निर्धारण में उदारतापूर्वक निर्णय लेते हुए किसानों को कम से कम 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की राहत राशि प्रदान की जाए। साथ ही दीपावली से पहले 5 हजार रुपये प्रति एकड़ की अंतरिम सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।
उन्होंने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा की मजबूत नींव हैं। विपरीत परिस्थितियों में किसानों का मनोबल बनाए रखना और उन्हें समय पर आर्थिक संबल देना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री किसानों की इन मांगों पर संवेदनशीलता से विचार कर शीघ्र निर्णय लेंगे, ताकि नुकसान झेल रहे किसानों के घरों में भी दीपावली का दीपक खुशियों के साथ जल सके।